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बजट सत्रः अगले वित्तीय वर्ष में होगा जाति सर्वेक्षणः दीपक बिरूआ

Ranchi: मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा है कि अगले वित्तीय वर्ष में जाति सर्वेक्षण होगा. वे सोमवार को सदन में प्रदीप यादव के सवाल का जवाब दे रहे थे. प्रदीप यादव ने कहा कि जाति सर्वे की मांग की जा रही है. भारत सरकार ने हाथ पीछे खींच लिया है. 17 फरवरी 2024 को कैबिनेट में जाति सर्वे का फैसला लिया जा चुका है. एस साल एक महीना हो गया. तेलंगाना में जाति सर्वे हो चुका है. जाति सर्वे समाज का एक्सरे और एमआरआई है. इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि जाति सर्वेक्षण का कार्य आवंटित होने के पश्चात कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के द्वारा इस संबंध में अग्रतर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. इसमें वित्तीय प्रबंधन सहित कई चीजों को देखा भी जाएगा. इसे भी पढ़ें - डोरंडा">https://lagatar.in/doranda-police-station-police-demands-money-cp-singh/">डोरंडा

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16 मई से पहले सर्वे पूरा हो जाएगा, तो नगर निकाय चुनाव कराया जाएगाः सुदिव्य

मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि 16 मई से पहले तीन जिलों में सर्वे का काम पूरा हो जाएगा तो समय में नगर निकाय चुनाव कराए जाएंगे. अगर विपरित परिस्थिति बनती है तो कोर्ट से समय देने के लिए आग्रह करेंगे. वे सदन में सरयू राय के सवाल का जवाब दे रहे थे. सरयू राय ने पूछा कि सरकार बिना ट्रिपल टेस्ट के चुनाव कराएगी या कोर्ट से और समय मांगेगी. इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि 21 जिलों में सर्वे का काम पूरा हो गया है. अभी समय है, तीन जिलों के सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा.

सरकार ओबीसी को आरक्षण देने के लिए कृत संकल्पितः सुदिव्य

मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि सरकार ओबीसी को आरक्षण देने के लिए कृत संकल्पित है. भाजपा के शासन काल में ओबीसी का आरक्षण 27 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी कर दिया गया. तमिलनाडू में 69 फीसदी आरक्षण है. मंशा साफ होती तो भाजपा भी 14 से 27 फीसदी कर देती. ट्रिपल टेस्ट के अंतर्गत डोर-टू-डोर सर्वे का कार्य सभी जिलों में कराया जा रहा है, जिसके अंतर्गत कोडरमा, रांची एवं देवघर को छोड़कर अन्य सभी 21 जिलों से प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है. जिन जिलों से प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है, उन जिलों में प्रतिवेदनों की समीक्षा व जांच के लिए आयोग की टीम द्वारा क्षेत्रों का परिभ्रमण किया जा रहा है.

बिहार में क्या ग्रेड पे मिलता है, इसकी अधिकारिक जानकारी नहीं: सुदिव्य

मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि जूनियर इंजीनियरों के ग्रेड पे से जुड़े सवाल पर कहा कि बिहार में क्या ग्रेड पे मिलता है. इसकी अधिरारिक जानकारी नहीं है. केंद्र के अनुरूप वेतनमान देने में सहमति है. सरकार के पास ग्रेड पे में बढ़ोत्तरी का कोई प्रस्ताव नहीं है. पेंशन की तुलना वेतनमान से नहीं की जा सकती. अगर प्रस्ताव दें तो विचार किया जाएगा. वे सदन में राजेश कच्छप के सवाल का जवाब दे रहे थे.  

इन राज्यों में जाति जनगणना

  • बिहार- बिहार सरकार ने 2 जून, 2022 को जाति आधारित जनगणना कराने का निर्णय लिया था. यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद लिया गया था. बिहार में यह सर्वेक्षण दो चरणों में पूरा किया गया और इसके आंकड़े 2 अक्टूबर, 2023 को जारी किए गए. आंकड़े के मुताबिक राज्य की कुल जनसंख्या 13 करोड़ 7 लाख से अधिक बताई गई.
  • कर्नाटक: कर्नाटक में 2015 में तत्कालीन सिद्धारमैया सरकार ने जाति आधारित जनगणना करवाई थी. हालांकि, इसके आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. यह सर्वेक्षण राज्य स्तर पर किया गया था, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई.
  • छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ सरकार ने भी जाति जनगणना कराने की प्रक्रिया शुरू की है. हालांकि इसकी आधिकारिक प्रगति और पूर्णता की स्थिति स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं है. 
 

इन राज्यों में भी हो रही मांग

उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और महान दल जैसे दलों ने जाति जनगणना की मांग की है. बसपा प्रमुख मायावती ने इसे सामाजिक न्याय के लिए जरूरी बताया है. महाराष्ट्र: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार ने जाति आधारित सर्वेक्षण की मांग उठाई है, खासकर बिहार मॉडल के आधार पर. तमिलनाडु: डीएमके सरकार ने केंद्र से दशकीय जनगणना के साथ जातिगत जनगणना कराने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया. कर्नाटक: साल 2015 में सिद्धारमैया सरकार ने जाति जनगणना कराई थी, लेकिन आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए. अब कांग्रेस सरकार के तहत इसे लागू करने और आंकड़े जारी करने की मांग फिर से उठ रही है. ओडिशा: बीजू जनता दल (बीजेडी) की नवीन पटनायक सरकार ने भी जाति जनगणना की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसके आंकड़े जारी नहीं हुए. तेलंगाना: तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब बीआरएस) और अन्य दलों ने जाति आधारित डेटा संग्रह की मांग की है, ताकि ओबीसी और अन्य समुदायों को उनका हक मिल सके. पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी जाति जनगणना के समर्थन में आवाज उठाई है, हालांकि यहां यह मांग अभी प्रारंभिक स्तर पर है.
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