NewDelhi : संसद का बजट सत्र आज 31 जनवरी से शुरू हो रहा है, जो नौ फरवरी तक चलेगा. कल यानी 1 फरवरी को केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट पेश करेंगे. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी बजट है. वहीं निर्मला सीतारमण का यह छठा बजट होगा. नयी सरकार कार्यभार संभालने के बाद पूर्ण बजट पेश करेगी. बजट सत्र से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को संसद में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलायी थी. जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी. हर सत्र से पहले यह एक तरह की पारंपरिक बैठक होती है. जिसमें विभिन्न दलों के नेता ने उन मुद्दों को सामने रखा, जिन्हें वे संसद में उठाना चाहते हैं और सरकार उन्हें अपने एजेंडे के बारे में जानकारी प्रदान करती है और उनका सहयोग मांगती है.
नयी सरकार जुलाई में पेश करेगी पूर्ण बजट
बता दें कि अंतरिम बजट सिर्फ नयी सरकार के आने तक सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए पेश किया जाता है. लोकसभा चुनावों के बाद जो नयी सरकार बनती है, वो पूर्ण बजट पेश करेगी. नयी सरकार की तरफ से जुलाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पूर्ण बजट पेश किया जायेगा.जानें बजट से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें
- देश का पहला बजट 7 अप्रैल, 1860 को पेश हुआ है. ईस्ट इंडिया कंपनी के स्कॉटिश अर्थशास्त्री और राजनेता जेम्स विल्सन ने इसे ब्रिटिश क्राउन के सामने पेश किया था.
- वहीं स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 में पेश हुआ है. जिसे वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था.
- बजचट सत्र का सबसे छोटा भाषण 1977 में तत्कालीन वित्त मंत्री हीरूभाई मुल्जीभाई पटेल ने बनाया था. जो मात्र 800 का शब्द था.
- वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहला बजट 1 फरवरी, 2020 में पेश किया था. जिसमें उन्होने 2 घंटे 42 मिनट तक भाषण दिया था. जो उस समय तक का सबसे लंबा भाषण था. उस समय वे अस्वस्थ महसूस कर रही थीं.
- वहीं शब्दों के लिहाज से सबसे लंबा भाषण मनमोहन सिंह ने 1991 में नरसिम्हा राव सरकार के तहत दिया था. मनमोहन सिंह ने 18,650 शब्दों में सबसे लंबा बजट भाषण दिया था. वहीं 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली के भाषण में 18,604 शब्द थे.
- 1999 तक केंद्रीय बजट फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था. यह ब्रिटिश काल की एक प्रथा थी जो तब तक जारी रही जब तक कि तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने समय में बदलाव नहीं किया. अरुण जेटली ने उस महीने के अंतिम कार्य दिवस का उपयोग करने की औपनिवेशिक युग की परंपरा से हटकर 2017 में 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करना शुरू किया
- 1955 तक बजट अंग्रेजी में पेश किया जाता था. कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने बाद में बजट पत्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में छापने का फैसला किया.
- 2017 तक रेल बजट और केंद्रीय बजट अलग-अलग पेश किया जाता था. 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया गया और एक साथ पेश किया गया.
- निर्मला सीतारमण इंदिरा गांधी के बाद बजट पेश करने वाली दूसरी महिला बनीं. इंदिरा गांधी ने वित्तीय वर्ष 1970-71 के लिए बजट पेश किया था.
- सीतारमण ने ब्रीफकेस ले जाने वाली परंपरा को भी खत्म करते हुए बजट दस्तावेजों को ले जाने के लिए एक ‘बही खाता’ की शुरुआत की. ‘बही खाता’ पर राष्ट्रीय चिन्ह लगा होता है. 2021 से बजट पेपरलेस हो गया, इसलिए कोई ‘बही खाता’ भी नहीं है. लेकिन जिस टैबलेट से सीतारमण बजट भाषण पढ़ती हैं, वह बही खाता जैसे लाल लिफाफे में लिपटा हुआ रहता है.
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