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प्रदूषण के कारण बच्चों के स्वभाव पर पड़ता है असर
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के इलाके में किये गए सर्वे में यह बात निकल कर सामने आई कि वहां पैदा होने वाले बच्चे ज्यादा शैतानियां करते हैं, ज्यादा गुस्सैल होते हैं, ज्यादा अटेंशन चाहते हैं, ज्यादा जिद्दी होते हैं और ज्यादा बदमाशी करते हैं. इसके उलट हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों के बच्चे ज्यादा विनम्र होते हैं, ज्यादा आज्ञाकारी होते हैं, कम गुस्सा करते हैं और ज्यादा अक्लमंद होते हैं. यह सब प्रदूषण के कारण होता है. छत्तीसगढ़ व दिल्ली में इंडस्ट्रियल पोल्यूशन बहुत ज्यादा है. इसका असर बच्चों पर पड़ रहा है. हिमाचल में इंडस्ट्रियल पोल्यूशन बेहद कम है, इसलिए वहां के बच्चे शरीफ दिखते हैं. यह फर्क है पोल्यूटेड और अनपोल्यूटेड एरिया का.आबादी का लोड जब नेचर पर देंगे, तो इननैचुरल हादसे होंगे
उन्होंने कहा कि अगर इंसान को इस पोल्यूशन को कम करना है, तो सरकार ने जो भी नियामक बनाए हैं, उसका 100 फीसदी अनुपालन करना होगा. उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया, जहां भारत की तुलना में कहीं ज्यादा उद्योग-धंधे चल रहे हैं और एक जमाने से चल रहे हैं. पोल्यूशन वहां भी होता है, परंतु कम होता है. क्योंकि वहां जो नियामक हैं, वो उसमें बराबर चेकिंग करते हैं. कहीं किसी ने कुछ गलत किया है, तो उसे दंडित करने में कोई भाई-भतीजावाद नहीं देखते. यही वजह है कि अमेरिका में ज्यादा उद्योग-धंधे होने के बावजूद प्रदूषण भारत से कम है. डॉ. रे ने भारत में पोल्यूशन बढ़ने का एक बड़ा कारण बढ़ती आबादी को बताया. उन्होंने कहा, आप आबादी कम नहीं कर रहे हैं. आबादी बढ़ती जा रही है. डिमांड एंड सप्लाई का चेन यहां टूट रहा है. इसे समझना होगा. आबादी का लोड आप जब नेचर पर देंगे, तो इननैचुरल हादसे होंगे. वही हो रहा है. आप देखें, फरवरी में टेंपरेचर 39 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया तो कैसे? इस पर विचार करने की जरूरत है.घर में मास्किटो वायर जलाना तो बेहद घातक
उन्होंने बताया कि घर में अगरबत्ती या धूप जलाना अथवा बीड़ी-सिगरेट पीना कैंसर को खुलेआम न्यौता देने के बराबर है. घर में मास्किटो वायर जलाना तो बेहद घातक है. इसके साथ ही धूपबत्ती का जलाना भी बेहद खतरनाक है. इसमें बहुत ज्यादा केमिकल्स होते हैं. ये केमिकल्स हमारे फेफड़ों में घुस कर उसे तो तबाह करते ही हैं, लंग्स, हार्ट और किडनी को भी बेतरह नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने बताया कि प्रदूषण से सबसे ज्यादा असर उन लोगों को पड़ता है, जो डायबिटीज के रोगी हैं.सुबह से लेकर शाम 4 बजे तक वॉक नहीं करना चाहिए
डॉ. रे ने बताया कि प्रदूषण सबसे ज्यादा जाड़े के मौसम में होता है. जाड़े के मौसम में प्रदूषण पीक पर होता है. ऐसे मौसम में किसी भी स्वस्थ आदमी को सुबह से लेकर दोपहर बाद 4 बजे तक कभी भी वॉक नहीं करना चाहिए, क्योंकि उस वक्त पॉल्यूटेड एयर सीधा आपकी नाकों में घुस कर फेफड़े आदि को प्रभावित करता है. इस दौरान पोल्यूशन आपकी नाक की सीध में होता है. आप जो हवा लेते हैं, सांस लेते हैं, वह सीधे आपकी नाक के रास्ते फेफड़े और शरीर के अन्य हिस्सों में प्रवेश कर जाता है. अगर घूमना ही है तो आप शाम 4 बजे के बाद घूमें.टमाटर की सब्जी हर किसी को जरूर खाना चाहिए
डॉ. रे ने जोर देकर कहा कि पॉल्यूशन के इस युग में जितनी भी हरी सब्जियां खा सकते हैं, खाएं. खास कर टमाटर की चटनी या टमाटर की सब्जी हर किसी को जरूर खाना चाहिए. अगर पॉकेट एलाव करे तो समुद्री मछलियां खानी चाहिए, क्योंकि उनमें फैट और प्रोटीन बेहतर होते हैं. रेड मटन हरगिज नहीं खाना चाहिए, चिकन चल सकता है. लेकिन, हरी सब्जी सबसे शानदार विकल्प है. इसे जरूर खाना चाहिए . उन्होंने चेताया कि एयर पॉल्यूशन के कारण कैंसर के भयावह होने का खतरा है. वायु प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहा तो कैंसर मरीजों की संख्या आज के 37 लाख से बढ़कर करोड़ में पहुंच जाएगी. सरकारी मैकनिज्म को इसके लिए कठोरता से काम करना होगा.मेले का मुख्य आकर्षण पाईका एवं कलसा नृत्य
संगोष्ठी में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत मुख्य अतिथि थे. डाॅ. एमके जमुआर ने विषय प्रवेश कराया. शिवानी लता ने धन्यवाद ज्ञापन किया. विशिष्ट अतिथि के रूप में आईएनए के डॉ पीके सिंह और सदर अस्पताल के डॉ विमलेश कुमार सिंह उपस्थित थे. धर्मेन्द्र तिवारी ने स्वागत संबोधन किया. मेले का मुख्य आकर्षण पाईका एवं कलसा नृत्य की प्रस्तुति रही. इसे भी पढ़ें – जल">https://lagatar.in/government-alert-regarding-water-crisis-instructions-to-urban-bodies-to-prepare-action-plan-in-a-week/">जलसंकट को लेकर सरकार अलर्ट, शहरी निकायों को एक सप्ताह में एक्शन प्लान बनाने का निर्देश [wpse_comments_template]

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