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अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है बुरुडीह डैम

Ghatshila : प्रकृति की गोद में बसा बुरुडीह गांव में जल पथ प्रमंडल 10 नंबर डिवीजन से मुराहिर जलाशय योजना के नाम से वर्ष 1983 में 20 एकड़ भूखंड पर डैम का निर्माण किया गया था. डैम के निर्माण में मुराही तथा टिकरी गांव के लोग विस्थापित भी हुए. वृहद डैम के निर्माण का उद्देश्य था कि आसपास के दर्जनों गांव के लोगों को डैम का पानी सिंचाई के लिए मिलेगा, परंतु दुर्भाग्य ऐसा रहा कि लगभग एक दशक से डैम के दाएं और बाएं फाटक से लाखों लीटर पानी का रिसाव होना शुरू हो गया. फाटक का मरम्मत नहीं हुआ. विभागीय उदासीनता के कारण बुरुडीह डैम अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है.

स्थिति तालाब जैसी बन गई

वर्तमान में डैम की स्थिति तालाब जैसी बन गई है. बुरुडीह डैम को विकसित करने के लिए जनप्रतिनिधियों के पास न कोई विजन है और न ही विभागीय पदाधिकारी की सोच है. बुरुडीह डैम में नौका विहार के लिए तथा प्राकृतिक सौंदर्य को देखने झारखंड सहित पश्चिम बंगाल और ओडिशा से सालों भर सैलानी यहां पहुंचते थे. एक दशक से यहां पर सिर्फ अक्टूबर से दिसंबर तक ही सैलानी आते हैं. सैलानियों के आने से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदा होता है, परंतु सैलानियों के लिए किसी तरह की सुविधा नहीं है. वर्षों से एक शौचालय की मांग, पेयजल के लिए चापाकल की मांग हो रही है, परंतु विभागीय अड़चन के कारण आज तक नहीं बन पाया. विधायक रामदास सोरेन ने इसे विकसित करने के लिए कई बार वन विभाग, जल पथ प्रमंडल के पदाधिकारी एवं डीडीसी के साथ निरीक्षण भी किया था, परंतु आज भी  स्थिति ढाक के तीन पात जैसी है. इसे भी पढ़ें-पांचवें">https://lagatar.in/crpf-jawans-distribute-chhabeel-in-memory-of-fifth-sikh-guru-arjan-dev-ji/">पांचवें

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