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धनबाद के व्यवसायी राजनीतिक दलों के आधार पर बंटे, कमजोर पड़ रहा आंदोलन

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) धनबाद के व्यवसायी इन दिनों अन्य राजनीति के आधार पर बंटे नजर आ रहे हैं. केंद्र या राज्य सरकार के खिलाफ चेंबर द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में सदस्यों का सहयोग नहीं मिल रहा, जिससे आंदोलन कमजोर पड़ रहा है. ज्वलंत मुद्दों पर इन दिनों विपक्षी दलों के बाद धनबाद के व्यवसायियों ने मोर्चा संभाल रखा है. लेकिन उनका आंदोलन अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है. क्योंकि चैम्बर से तमाम पदाधिकारी किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं.

 ज्वलंत मुद्दों पर चेम्बर करता है आंदोलन

धनबाद में ऐसे कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिस पर आए दिन राजनीतिक पार्टियों के साथ व्यवसायी भी आंदोलन में उतरते हैं. बिजली, पानी, गया पुल ओवर ब्रिज, महंगाई सभी मुद्दों पर धनबाद जिला चेंबर की अलग-अलग शाखाओं के नेतृत्व में तमाम व्यवसायी आंदोलन करते आ रहे हैं. लेकिन अब उनका आंदोलन पहले जैसा नहीं दिखाई दे रहा है.

  पार्टी से संबंध रखने वाले सदस्य रहते हैं नदारद

केंद्र सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में भाजपा समर्थक धनबाद जिला महासचिव राजीव शर्मा तथा बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र अरोड़ा अनुपस्थित होते हैं. लेकिन जब राज्य की हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना हो तो सुरेंद्र अरोड़ा के साथ राजीव शर्मा तथा अन्य भाजपा समर्थकों की मौजूदगी देखने को मिल जाएगी. हेमंत सरकार के विरोध में जिला चेंबर के पूर्व अध्यक्ष राजेश गुप्ता, शिवाशीष गुप्ता समेत झामुमो से ताल्लुक रखने वाले सदस्य नदारद होते हैं. इधर कांग्रेस समर्थक बैंकमोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रभात सुरोलिया भी केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में सबसे पहले सड़क पर उतरने वालों में एक हैं.

 व्यावसायिक हित से ज्यादा पार्टी से लगाव

बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के सेक्रेटरी प्रमोद गोयल का कहना है कि चेंबर व्यापारियों के हित के लिए बना है. चेंबर के तमाम पदाधिकारियों को पार्टी से अलग होकर व्यवसायियों की मूलभूत समस्याओं के लिए सरकार के खिलाफ खड़ा होना जरूरी है. उन्होंने लगातार मीडिया के सवाल को बिल्कुल सही मानते हुए आरोप को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि आजकल आंदोलन में पूर्ण समर्थन नहीं मिल पा रहा है

    व्यवसाय के हित में काम करने की जरूरत

धनबाद की जनता हर समस्या के लिए चेंबर की ओर देखती है. ऐसे में अगर हमारा संगठन राजनैतिक दलों के कारण कमजोर पड़ जाए तो यह बहुत गलत बात है. उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहेंगी. आज भाजपा की सरकार है तो कल कांग्रेस की होगी तो परसों जेएमएम की. व्यवसायियों को पार्टी से थोड़ा अलग हटकर अपने व्यवसाय हित में काम करने की जरूरत है.

  पार्टी देखना है तो खुद को चेंबर से अलग कर लें

प्रमोद गोयल ने कड़े लहजे में कहा कि अगर चेंबर के सदस्यों को पार्टी देखना है तो उन्हें अपने आप को चेंबर से अलग कर लेना चाहिए. चेंबर में रहेंगे तो व्यापारियों की समस्याओं को उठाना पड़ेगा. चाहे सरकार किसी की हो या फिर आप किसी भी दल का समर्थन करते हों. इसका असर चेंबर के आंदोलन पर नहीं दिखना चाहिए.

 प्रभात सुरोलिया ने भी पार्टी को कमजोरी का कारण

बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रभात सुरोलिया ने भी सही माना कि राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखने वाले व्यवसायी आंदोलन में कम देखने को मिल रहे हैं.  उन्होंने उदाहरण के तौर पर कहा कि पिछले दिनों जब हेमंत सोरेन ने बाजार समिति पर 2% का टैक्स लगाया था तो पूरा बाजार समिति अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई. आज केंद्र ने दही, पनीर, शहद, आटा और चावल जैसी गैर-ब्रांडेड वस्तुओं पर 5% जीएसटी लगाया दिया तो बाजार समिति ने चुप्पी साध ली है.

  राजनीतिक दलों से रिश्ता व्यापारी हित को नुकसान

पुराना बाजार चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष सोहराब खान का कहना है कि राजनीतिक दलों से रिश्ता व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचा रहा है. व्यवसायी किसी पार्टी से ताल्लुक रख कर व्यवसायियों या व्यवसाय का हित नहीं कर सकते. आज इन्हीं कारणों से संगठन खोखला होता जा रहा है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-hope-for-appointment-of-home-guard-candidates-not-completed-even-in-five-years-sitting-on-dharna/">धनबाद

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