- 1606 करोड़ का दो नंबर का कोयला बेच डाला, 161 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी
- धनबाद जाकर सरयू राय ने जुटाए कई अहम सबूत, ईडी और सीबीआई को लिखेंगे पत्र
- कोयला चोरी पर पुलिस-प्रशासन, सांसद-विधायक, बीसीसीएल अफसर चुप क्यों- सरयू राय
- एनवायरमेंटल क्लीयरेंस से अधिक निकाला जा रहा कोयला
- बीसीसीएल की ओर से दर्ज कराए गए FIR ईडी क्यों नहीं कर रहा टेकओवर
- झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार का शासन तंत्र फेल, लगे राष्ट्रपति शासन
चुप्पी है रहस्यमयी
कोयले का यह काला खेल सामने आने के बाद विधायक सरयू राय ने दो बार धनबाद में कैंप किया. इस पूरे मामले की जांच की. कई तथ्य जुटाए हैं. कौन-कौन से कोयला माफिया इस खेल में शामिल हैं. आउटसोर्सिंग और बंद पड़े खदानों अवैध खनन, उनके अवैध परिवहन और बीसीसीएल की कंपनियों के सार्वजनिक स्थलों को अवैध कोयला डीपो बनाने को लेकर उन्होंने सबूत इकट्ठा किये हैं. सरयू राय ने कहा कि आश्चर्य इस बात की है कि कोयला चोरी की सूचना पुलिस-प्रशासन, स्थानीय नेताओं और बीसीसीएल के अफसरों को है. हर दिन अखबारों में खबरें भी छप रही हैं, लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा है. यह बड़ा सवाल है. आखिर सब मौन क्यों हैं.बीसीसीएल की कॉलोनी में बन गये अवैध डिपो, कंपनी खामोश
सरयू राय ने कहा कि कोयले का अवैध खनन, ट्रांसपोर्टिंग और बिक्री का धनबाद बड़ा हब बन गया है. भूली में बीसीसीएल की कॉलोनी है. वहां के लोग परेशान हैं. कॉलोनी के भीतर खाली पड़ी जमीन को अवैध तरीके से कोयला डिपो बना दिया गया है. ट्रकों और बाइक से कोयला लाकर यहां स्टोर किया जाता है. बीसीसीएल ने जिन आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों को खदान दिया है वहां एनवायरमेंटल क्लीयरेंस से अधिक कोयला निकाला जा रहा है, लेकिन बीसीसीएल के अधिकारी मौन साधे हुए हैं. सरयू राय ने दावा किया है कि धनबाद का कोयला चोरी का मामला साहिबंगज के अवैध पत्थर खनन मामले से कई गुना गंभीर मामला है.ईडी और सीबीआई करे जांच
उन्होंने कहा कि कानून लागू कराने वाला तंत्र मौन है. इस काले खेल में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार की भी हिस्सेदारी है. धनबाद में भय का माहौल है. कोई कोयला चोरी के मामले पर मुंह नहीं खोलना चाहता. झारखंड में केंद्रीय एजेंसी सीबीआई एसपी और ईडी का ऑफिस है. ये एजेंसियां मनी लाउंड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों पर राज्यभर में कार्रवाई कर रही है, लेकिन कोयला चोरी के मामले में आखिर कार्रवाई क्यों नहीं. सरयू राय इसे लेकर सीबीआई और ईडी को पत्र भी लिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब राज्य में कानून का शासन खत्म हो जाए, तो राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए, लेकिन झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का तंत्र फेल हो गया है. इसे भी पढ़ें – एससी-एसटी">https://lagatar.in/sc-st-land-is-being-looted-government-will-get-it-back-champai-soren/">एससी-एसटीकी जमीन लूटी जा रही है, सरकार वापस दिलायेगी : चंपई सोरेन [wpse_comments_template]

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