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CAG ने अदिवासी जमीन प्रबंधन के ऑडिट के मामले में झारखंड सरकार की राय खारिज की

Ranchi: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने आदिवासी जमीन के प्रबंधन के ऑडिट के मामले में राज्य सरकार की राय खारिज कर दी है. CAG ऑडिट के अधिकार को अपना संवैधानिक अधिकार बताया है. इसके बाद झारखंड के महालेखाकार ने आदिवासी जमीन ऑडिट के लिए फिर से दस्तावेज की मांग की है.
 

Ranchi: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने आदिवासी जमीन के प्रबंधन के ऑडिट के मामले में राज्य सरकार की राय खारिज कर दी है. CAG ऑडिट के अधिकार को अपना संवैधानिक अधिकार बताया है. इसके बाद झारखंड के महालेखाकार ने आदिवासी जमीन ऑडिट के लिए फिर से दस्तावेज की मांग की है.

 

जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा महालेखाकार को आदिवासी जमीन के प्रबंधन के लिए आवश्यक दस्तावेज देने से इनकार करने के बाद महालेखाकार ने भारत के नियंत्रक सह महालेखा परीक्षक को इससे संबंधित सूचना दी. इसके बाद राज्य सरकार द्वरा दी गयी कानूनी राय की समीक्षा CAG के प्रोफेशनल प्रैक्टिस ग्रुप (PPG) में हुई. समीक्षा के बाद PPG ने राज्य सरकार की राय को खारिज कर दिया.

 

PPG ने पूरे प्रकरण में अपनी राय देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 149, 151 और प्रोविज ऑफ द कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जेनरल एक्ट 1971 के अलावा रेगुलेशन ऑन ऑडिट एंड अकाउंटस में निहित प्रावधानों के तहत CAG को ऑडिट के लिए सभी दस्तावेज देखने का अधिकार है. यह अधिकार उन सभी सरकारी कार्यालयों तक फैला है जिन्हें जनता के पैसों या संसाधनों से जुड़े काम सौंपे गये हैं. ऑडिट, अदालती फैसलों में दखल नहीं देता है. ऑडिट यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी काम काज और मैनेजमेंट की जिम्मेदारियां कानून और नियमों के तहत हो रही हैं या नहीं.

 

PPG की राय मिलने के बाद महालेखाकार ने सरकार को फिर एक बार पत्र लिखा है. इसमें PPG द्वारा दी गयी राय का उल्लेख किया गया है. साथ ही आदिवासी जमीन प्रबंधन के ऑडिट के लिए संबंधित दस्तावेज की मांग की गयी है.

 

उलेखनीय है कि महालेखाकार ने आदिवासी जमीन के प्रबंधन के ऑडिट के लिए रांची जिले से आवश्यक दस्तावे मांगे थे. लेकिन राज्य सरकार विधि विभाग से राय लेने के बाद महालेखाकार को इससे संबंधित दस्तावेज देने से इनकार कर दिया था. इस मामले में सरकार की ओर से यह तर्क पेश किया गया था कि आदिवासी जमीन के हस्तांतरण का मामले अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है. उपायुक्त सहित राजस्व से जुड़े अधिकारियों द्वारा दिया गया फैसले की समीक्षा का अधिकार राजस्व पर्षद को है. ऑडिट को इसका अधिकार नहीं है. इसलिए दस्तावेज ऑडिट के लिए नहीं दिया जा सकता है.

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