- कोर्ट ने 21 याचिकाओं पर सुनाया फैसला
- चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों को राहत दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार ने नियमावली के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए स्नातक की डिग्री को निर्धारित अंकों के साथ नियुक्ति के लिए मान्य योग्यता माना और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने संशोधित विज्ञापन में इसे शामिल किया, तो बाद में अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी को स्नातकोत्तर (पीजी) या आचार्य की डिग्री नहीं होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस संबंध में दायर विनोद कुमार सिंह सहित सभी संबंधित रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार करने और उन्हें स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि नियुक्ति से संबंधित पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए.
क्या है मामला
झारखंड सरकार ने वर्ष 2015 में हाईस्कूल शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियमावली बनाई थी. इसके नियम 9(1)(i) में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक की नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई थी. संस्कृत सहित कुछ विषयों के लिए स्नातकोत्तर या आचार्य की डिग्री का प्रावधान था.
इसके बाद जेएसएससी ने 28 दिसंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 जारी कर विभिन्न विषयों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की. संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर आयोग ने 10 जनवरी 2017 को राज्य सरकार से संशोधन का प्रस्ताव दिया.
राज्य सरकार ने नियमावली के नियम 16 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 11 जनवरी 2017 और 13 जनवरी 2017 को पत्र जारी कर संबंधित विषयों में निर्धारित न्यूनतम अंकों के साथ स्नातक की डिग्री को भी पात्रता के रूप में मान्यता दी. इसके बाद जेएसएससी ने संशोधित विज्ञापन जारी किया, जिसमें संस्कृत विषय के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री और बीएड को भी निर्धारित योग्यता में शामिल किया गया.
परीक्षा में सफल होने के बाद भी उम्मीदवारी कर दी गई थी खारिज
अभ्यर्थियों ने संशोधित विज्ञापन के आधार पर आवेदन किया. वे चयन प्रक्रिया में शामिल हुए, परीक्षा में सफल हुए और उन्हें प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए भी बुलाया गया. हालांकि 21 जून 2023 को जारी नोटिस के माध्यम से उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि आवेदन की अंतिम तिथि 25 अप्रैल 2017 तक उनके पास संबंधित विषय में स्नातकोत्तर या आचार्य की डिग्री नहीं थी.
इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर उम्मीदवारी खारिज करने के निर्णय को चुनौती दी. उनका कहना था कि राज्य सरकार ने स्वयं नियमावली के नियम 16 के तहत स्नातक की डिग्री को पात्रता के रूप में मान्यता दी थी और आयोग ने उसी के अनुरूप संशोधित विज्ञापन जारी किया था. ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम चरण में पीजी या आचार्य की डिग्री अनिवार्य बताकर उनकी उम्मीदवारी खारिज करना मनमाना और अनुचित है.
राज्य सरकार और आयोग की दलील खारिज
राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वर्ष 2015 की नियमावली में संस्कृत विषय के लिए स्नातक की डिग्री को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता के रूप में निर्धारित नहीं किया गया था. विज्ञापन में दी गई योग्यता नियमावली के विपरीत थी और विज्ञापन के आधार पर वैधानिक नियमों को बदला नहीं जा सकता. इसलिए आवश्यक स्नातकोत्तर या आचार्य की डिग्री नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज करना उचित था. हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
राज्य सरकार अपने ही निर्णय से पीछे नहीं हट सकती
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने अपने फैसले में कहा कि नियमावली के नियम 16 के तहत राज्य सरकार को नियमों के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने और आदेश जारी करने का अधिकार प्राप्त है. नियम में यह भी स्पष्ट है कि इस शक्ति के तहत लिया गया निर्णय नियमावली का ही हिस्सा माना जाएगा.
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 11 और 13 जनवरी 2017 को संबंधित विषयों में स्नातक की डिग्री को निर्धारित अंकों के साथ पात्रता के रूप में मान्यता दी थी. इसके बाद जेएसएससी ने संशोधित विज्ञापन में इस योग्यता को शामिल किया. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने नियमावली से अलग जाकर अपने स्तर पर स्नातक की डिग्री को पात्रता बना दिया था.
अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं योग्यता को स्पष्ट कर चुकी थी और आयोग ने उसके अनुरूप विज्ञापन जारी किया था, तब बाद में उसी निर्णय की अनदेखी कर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज करना उचित नहीं है. ऐसा करने से संशोधित विज्ञापन और सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण निरर्थक हो जाएंगे.
चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी खारिज करने संबंधी 21 जून 2023 के नोटिस और संबंधित मामलों में जारी अन्य आदेशों को कानूनन टिकाऊ नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया. अदालत ने सभी संबंधित रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और जेएसएससी को अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार करने और उन्हें स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया.
अदालत ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. इसके साथ ही सभी संबंधित याचिकाओं का निष्पादित कर दिया.
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