सुबह से शाम तक जी-तोड़ मेहनत करती है मालो देवी
पेट की आग बुझाने के लिए मालो देवी सड़क पर साल वृक्ष के फल को साफ सफाई करती नजर आती है. पूछने पर कहती हैं कि सुबह में वो सरई (साल वृक्ष का फल) को लेने के लिए जंगल निकल जाती है. जेठ की तपती धूप में इसे लेकर जंगल से लौटती है. इसके बाद इसको बाजार में पहुंचाने योग्य बनाने के लिए आग लगा कर इसकी पंखुड़ियों को जलाती है. इसके बाद कड़ी धूप में सुखा कर इसको दरदरा बना कर बाजार पहुंचाती है. काफी मेहनत के बाद एक सप्ताह में दस से बाहर किलो जमा कर लेती है मालो देवी. इसे भी पढ़ें :गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-two-real-brothers-arrested-for-murder-sent-to-jail/">गिरिडीह: हत्यारोपी दो सगा भाई गिरफ्तार, भेजे गए जेल
खरीद केंद्र गांव में होता तो अच्छा रहता- मालो देवी
मालो देवी कहती है कि गांव में इसको खरीदने वाला कोई नहीं मिलता है, जिस कारण उसे बेचने के लिए शहर जाना पड़ता है. इतनी मेहनत के बाद भी शहर में 10 रूपये किलो के दर से ही बिक पाता है. मालो देवी कहती है सरकार अगर गांव में ही खरीद केंद्र बनाती तो हम लोगों को शहर आने-जाने का खर्चा बचता. मालो देवी के घर की माली हालत भी अच्छी नहीं है. पेट की आग बुझाने के लिए इस उम्र में भी जी-तोड़ मेहनत करती है.सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता- मालो देवी
सरकार की ओर से मिलने वाला वृद्धा पेंशन और अन्य लाभ भी मालो देवी को नहीं मिलता है. वह कहती है कि इसके लिए मुखिया को कई बार बोल चुकी हूं. आपकी सरकार, आपके द्वार के तहत लगे शिविर में भी आवेदन दे चुकी हूं, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/two-ieds-found-again-in-chaibasa-security-forces-defused/">चाईबासामें फिर मिले दो आईईडी, सुरक्षाबलों ने किया डिफ्यूज
Leave a Comment