Lagatar Desk-मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसी प्रदर्शन स्थल पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा कि ऐसी जगहों पर केवल एक तय समय के लिए ही रहा जा सकता है, ताकि दूसरे समूह भी उनका इस्तेमाल कर सकें.
बार एंड बेंच के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच दिल्ली में अक्तूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
CJI सूर्यकांत ने कहा, "आप हमेशा के लिए किसी प्रदर्शन स्थल पर कब्जा नहीं कर सकते. दूसरे प्रदर्शनकारी भी हैं. किसान कहां जाएंगे? मजदूर कहां जाएंगे? ट्रेड यूनियन कहां जाएंगी? बेघर लोग कहां जाएंगे? हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है." कोर्ट ने प्रदर्शनों की वजह से दिहाड़ी मजदूरों को होने वाले नुकसान का भी जिक्र किया.
CJI ने कहा, "यहां अलग-अलग तरह के दावे हैं. विरोध करने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, ठीक वैसे ही जैसे व्यापार करने का अधिकार है. हम सिर्फ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के व्यापार की बात नहीं कर रहे हैं. हम दिहाड़ी मजदूर की रोजी-रोटी के साधन की बात कर रहे हैं. वह अपनी रोज की रोटी कमाने के लिए कहां जाएगा?"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) को केवल एक दिन के लिए विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन वे वहां 17 दिनों तक डटे रहे. उन्होंने कहा, "इसके बाद बिना अनुमति लिए उन्होंने संसद की ओर मार्च किया. संसद सिर्फ एक राजनीतिक इमारत नहीं है. यह भारत की संप्रभुता का प्रतीक है. आपको संसद तक जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. इसी तरह, बिना अनुमति के भारत के सुप्रीम कोर्ट तक जाकर विरोध प्रदर्शन करने की भी इजाज़त नहीं दी जा सकती."
व्यापारियों का आरोप: विरोध-प्रदर्शन से हुआ नुकसान
व्यापारियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि विरोध-प्रदर्शनों के कारण 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय की गई जगह, रामलीला मैदान, कनॉट प्लेस से लगभग एक मील दूर है.
उन्होंने कहा, "रामलीला मैदान के एक मील के दायरे में लाखों लोग रहते हैं और यहाँ कई तरह के थोक बाज़ार हैं. इसमें आसफ अली रोड, दरियागंज, तुर्कमान गेट, कमला मार्केट शामिल हैं और आगे चलकर यह जामा मस्जिद से जुड़ जाता है. यह सब एक मील के दायरे में ही है. यहाँ कम से कम 50 लाख लोग रहते हैं. सरकार को अब इस पर विचार करना चाहिए और कोई योजना लानी चाहिए—चाहे वह दिल्ली के लिए हो या अन्य राज्यों की राजधानियों के लिए. अब बात सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रह गई है."