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मामला गलत जमीन के बदले CCL में नौकरियां देने का : दावेदारी की समीक्षा जिला स्तरीय समिति के हवाले

Ranchi : राजस्व पर्षद द्वारा 371.78 एकड़ जमीन पर दोनों पक्षों की दावेदारी को खारिज करने के बाद भू-राजस्व विभाग ने एक समिति का गठन कर दिया है. समिति ने अपनी अब तक सरकार को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है. जिला स्तर पर जमीन की दावेदारी के सिलसिले में हुई जांच के दौरान पश्चिम बंगाल ने मोहन सोरेन की ओर से पेश किया गये दस्तावेज को गलत बताया है.

उल्लेखनीय है कि राजस्व पर्षद ने जमीन पर दोनों पक्षों की दावेदारी को खारिज करने के साथ ही अपने आदेश की प्रति भू-राजस्व विभाग, वन विभाग, जिला प्रशासन और सीसीएल को भेजने का निर्देश दिया था. इसका उद्देश्य फैसले में उठाये गये कानूनी बिंदुओं पर जांच कर अपने अपने स्तर से कार्रवाई करना है. 

राजस्व पर्षद के पत्र के आलोक में भू-राजस्व विभाग ने उपायुक्त को पूरे मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. इस निर्देश के बाद जिला प्रशासन की ओर से मामले की समीक्षा कर 30 अक्टूबर 2023 को एक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गयी. इसके बाद उपायुक्त की ओर से एक दूसरी समीक्षा रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गयी. इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि पहले भेजी गयी रिपोर्ट में समीक्षा के दौरान तत्कालीन अपर समाहर्ता ने कई बिंदुओं को शामिल नहीं किया था. इसलिए नये सिरे से समीक्षा कर रिपोर्ट भेजी जा रही है.

राजस्व विभाग को दूसरी बार भेजी गयी समीक्षा रिपोर्ट में सरदार खजान सिंह की दावेदारी को तकनीकी और दस्तावेज के आधार पर खारिज कर दिया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कोल इंडिया के R&R Policy मे सुविधा देने का प्रावधान राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकार द्वारा जमीन का मालिकाना हक सत्यापित करने के बाद है. लेकिन सीसीएल ने इसके बिना ही खजान सिंह के पारिवारिक सदस्यो की अनुशंसा के आलोक में नौकरियां दी. 

रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट के आधार पर मोहन सोरेन व अन्य की दावेदारी को खारिज कर दिया गया. मुख्यालय के दूसरी रिपोर्ट भेजने से पहले मोहन सोरेन द्वारा पेश किये गये सेल डीड की जांच के लिए कोलकाता के निबंधन कार्यालय को भेजा गया. कोलकाता निबंधन कार्यालय ने अपने दस्तावेज की जांच के बाद मोहन सोरेन की दावेदारी से संबंधित दोनों सेल डीड को अस्तित्व विहीन और फर्जी करार दिया. 

कोलकाता मुख्यालय द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में यह कहा गया कि सरदार राम सिंह पजाबी द्वारा मौजा पोटंगा की जमीन बेचे जाने से संबंधित कोई दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं है. रिपोर्ट में मौजा पोटंगा की जमीन का उल्लेख करते हुए यह कहा गया कि जमीन से संबंधित रिकार्ड मे Mortgagee के रुप मे भूषण मंडल और Mortgagor के रुप में मदन गोपाल डे का नाम दर्ज है. दस्तावेज में हस्तांतरण का प्रकार Mortage दर्ज है. 

जिला प्रशासन की ओर से दूसरी रिपोर्ट मिलने के बाद भू-राजस्व विभाग ने फिर से पूरे प्रकरण की समीक्षा करने का आदेश दिया. इस आदेश के आलोक मे जिला प्रशासन ने जनवरी 2024 में मामले की फिर से समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है. समिति द्वारा समीक्षा की कार्रवाई जारी है. 

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