Amit Singh Ranchi: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में अबतक 110 करोड़ रुपए की संदिग्ध निकासी कर भुगतान के मामले सामने आ चुके हैं. रांची, खूंटी, हजारीबाग, चाईबासा और धनबाद में करोड़ों की वित्तीय धोखाधड़ी हुई है. आरोपी कई इंजीनियरों और क्लर्कों पर वित्तीय अनियमितता के मामले चल रहे हैं. रांची और हजारीबाग में करोड़ों के संदिग्ध भुगतान के मामले में इंजीनियरों पर एफआईआर हो चुके हैं. इंजीनियरों ने अपने फायदे के लिए जलापूर्ति योजना में काम करने वाली कंपनियों के खातों में करोड़ों का अवैध भुगतान किया, यह जांच में साबित हो चुका है. पेयजल विभाग में अभी वित्तीय अनियमितता आदि को लेकर 15 जलापूर्ति योजनाओं की जांच चल रही है. विभागीय इंजीनियरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. वहीं विभाग द्वारा गठित टीम कई योजनाओं की जांच कर रही है. जांच पूरी होने पर 110 करोड़ की संदिग्ध निकासी कर भुगतान के आंकड़े बढ़ भी सकते है. रांची के रुक्का प्रमंडल में 1.35 करोड़ की संदिग्ध निकासी का मामला पहले प्रकाश में आया. इसके बाद महालेखाकार की जांच में संदिग्ध निकासी की रकम बढ़ कर 20 करोड़ से ज्यादा हो गई. ऐसे कई मामले अब पेयजल विभाग के विभिन्न प्रमंडलों में उजागर हो रहे हैं.
35 इंजीनियरों के खिलाफ चल रही कार्रवाई
पेयजल विभाग के जल जीवन मिशन, हर घर नल जल योजना, क्लस्टर, एसवीएम आदि योजनाओं में अनियमितता का मामला कई बार विधानसभा में भी उठ चुका है. विभाग के अभियंता प्रमुख से लेकर जूनियर इंजीनियर तक पर कपटपूर्ण अवैध निकासी करने का आरोप विभागीय जांच में साबित हो चुका है. विभाग के करीब 35 इंजीनियरों के खिलाफ अनियमितता करने का मामला चल रहा है. पेयजल विभाग के मंत्री मिथलेश ठाकुर ने खुद जांच के दौरान जलापूर्ति योजनाओं में गड़बड़ी का मामला पकड़ते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं. जिन योजनाओं में वित्तीय अनियमितता आदि के मामले सामने आ रहे हैं, इन योजनाओं की शुरुआत पूर्व की सरकार के कार्यकाल में हुए थे. अभियंता प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप
पेयजल विभाग में कमीशन के लिए इंजीनियर कुछ भी कर सकते हैं. यही वजह है कि विभाग के अभियंता प्रमुख जैसे पद पर बैठेने वाले इंजीनियरों पर गंभीर आरोप लगे. कई दोषी भी ठहराए गए. चापानल घोटाला में तत्कालीन अभियंता प्रमुख रमेश कुमार पर गंभीर आरोप लगे. उसके बाद के अभियंता प्रमुख श्वेताभ कुमार एक मामले में दोषी पाए गए. इनपर धनबाद में अपने करीबी ठेकेदार को नियम विरुद्ध काम देने का आरोप लगा. एक मामले में श्वेताभ कुमार को दोषी पाते हुए विभाग जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर 15 मार्च 2022 को पेंशन नियमावली के नियम 139 के तहत पेंशन राशि से दो वर्ष तक 10 प्रतिशत कटौती का आदेश जारी हुआ. वहीं 31 दिसंबर 2023 को सेवानिवृत्त हुए अभियंता प्रमुख रघुनंदन शर्मा पर एक एजेंसी को विशेष लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है. करोड़ों की हेराफेरी के मामले, आरोपियों पर हुई कार्रवाई
केस वन : 1 पेयजल विभाग के हजारीबाग प्रमंडल में 10 करोड़ के अवैध निकासी की गई. इस मामले में कार्यपालक अभियंता मार्कंडेय कुमार राकेश, अनुबंधकर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर रोकश कुमार और अकाउंटेट उमेश कुमार पर एफआईआर दर्ज किया गया. आरोपियों ने कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय डीजल आदि खर्च के नाम पर करोड़ों की निकासी की थी. केस संख्या : 2 पेयजल विभाग के चाईबासा प्रशाखा मंझारी में 62 हजार का संदिगध़ भुगतान किया गया. जिसमें जेई कामदेव उरांव को आरोपी ठहराया गया. यह भुगतान जेई ने बिना किसी विपत्र, यानी बिल के ही अग्रिम के रूप रूप में भुगतान किया था. जेई ने चाईबासा स्थित यूबीआई के खाता संख्या- 1649010017116 में जमा राशि की संदिग्ध निकासी की थी. केस संख्या : 3 पेयजल विभाग चाईबासा के तहत 94 करोड़ की तांतनगर जलापूर्ति योजना में 17 करोड़ के संदिग्ध भुगतान का मामला सामने आया. जांच के दौरान खुद विभागीय मंत्री ने गड़बड़ी पकड़ी थी. योजना में काम करने वाली एजेंसी को बिना सप्लाई के ही करोड़ों का भुगतान किया गया था. इस मामले में तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संजय कुमार शर्मा, एसडीओ मंगीलाल गिलुआ और जेई कैलाश राम, काम करने वाली एजेंसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई. केस संख्या : 4 पेयजल विभाग के जमशेदपुर और आदित्यपुर प्रमुंडल में निर्मल भारत अभियान के तहत वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया. जमशेदपुर प्रमंडल में 50 लाख 83 हजार और आदित्यपुर प्रमंडल में 66 लाख 16 हजार की अवैध निकासी बताया गया. इस कपटपूर्ण निकासी के लिए विभागीय जांच में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता रघुनंदन शर्मा को आरोपी ठहराया गया था. जब रघुनंदन शर्मा विभाग के मुख्य अभियंता सीडीओ बने, तक यह मामला रफा दफा हो गया. केस संख्या : 5 महागामा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए 1.64 करोड़ आवंटित हुए. जिसमें से एजेंसी को बिना काम के ही 70 लाख का भुगतान कर दिया गया. इसमें एसीबी ने 12 इंजीनियर और एक ठेकेदार पर मामला दर्ज किया था. इन योजनाओं में वित्तीय अनियमितता की शिकायत
1. रांची शहरी जलापूर्ति योजना 2. खूंटी जलापूर्ति योजना 3.चाईबासा शहरी जलापूर्ति योजना 4.गढ़वा शहरी जलपूर्ति योजना 5.पाकुड़ शहरी जलापूर्ति योजना 6.देवघर शहरी जलापूर्ति याजना 7.धनबाद शहरी जलापूर्ति योजना 8.बाघमारा शहरी जलापूर्ति योजना 9.टुंडी कोल्हर जलापूर्ति योजना 10.चिरकुंडा शहरी जलापूर्ति योजना [wpse_comments_template]
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