जल्द कैबिनेट में रखा जाएगा झारखंड में कास्ट सर्वे का प्रपोजल
लोकसभा चुनाव के बाद कास्ट सर्वे की शुरू की जाएगी प्रक्रिया
Ravi Bharti
Ranchi: झारखंड में जातिगत जणगणना का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा. जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव के बाद कास्ट सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. जातिगत जनगणना बिहार के तर्ज पर होगी. जानकारी के अनुसार कास्ट सर्वे के लिए ग्रामीण और समाज कल्याण सहित कई विभागों पर विचार किया गया, लेकिन सर्वेक्षण के लिए कार्मिक विभाग को अंतिम रूप से चुना गया. कार्मिक विभाग ही इसकी एसओपी तैयार करेगा. सीएम चंपाई सोरेन ने भी सोशल मीडिया ``एक्स`` पर पोस्ट किया है कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी, झारखंड तैयार है. इधर राहुल गांधी ने भी अपनी न्याय यात्रा के दौरान जातिगत जनगणना की वकालत की थी.
लोकसभा और विधानसभा में छाया रहेगा मामला
कॉस्ट सर्वे का मसला आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पूरी तरह से छाया रहेगा. हालांकि कास्ट सर्वे के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद को बनाया गया है. बहरहाल जो सीन नजर आ रहा है. उसके हिसाब से लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण, बूथों का निर्धारण, मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण आदि की प्रक्रिया शुरू हो गई है. लोकसभा चुनाव खत्म होंगे तो विधानसभा के चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी. इन परिस्थितियों में 2024 के अंत तक राज्य में जातीय जनगणना के आसार नहीं लगते. पर यह मसला झारखंड की सियासी फिजां में छाया रहेगा.
झामुमो, कांग्रेस और राजद हैं पक्षधर
राजद जातीय जनगणना के समर्थन में हैं. गाहे-बेगाहे एनडीए में शामिल आजसू भी कास्ट सर्वे की मांग करती रही है. लेकिन विपक्षी दल भाजपा इस मसले पर ज्यादा कुछ नहीं बोल रही. सीएम चंपाई सोरेन ने कहा है कि जिस समूह की जितनी आबादी है, उसे उसी के अनुसार अधिकार मिलना चाहिए. जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर दो साल पहले ही राज्य में सभी दलों की सहमति बनी थी. इसके बाद सर्वदलीय शिष्टमंडल के सदस्यों ने सितंबर 2021 में दिल्ली जाकर इससे संबंधित मांग पत्र गृह मंत्री को सौंपा था. कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से इस पर पहल हो.
नगर निकाय चुनाव को लेकर अब तक अनिर्णय की स्थिति
सभी नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त हुए लगभग एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन सरकार इनका चुनाव कराने को लेकर अब तक अनिर्णय की स्थिति में है. मुश्किल यह है कि इस आरक्षण का प्रतिशत कितना हो, ये तय करने के लिए राज्य सरकार को ट्रिपल टेस्ट सर्वे के जरिए राज्य की पिछड़ी आबादी की संख्या और उनकी आर्थिक-सामाजिक स्थिति का आकलन करना होगा. सरकार ने ट्रिपल टेस्ट कराने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग को अधिकृत भी किया है. लेकिन इस पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है.
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