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जातिगत जनगणना मामला : सुप्रीम कोर्ट से नीतीश सरकार को झटका, कहा- पहले HC का फैसला आने दें

Patna: बिहार सरकार को जातिगत जनगणना के मामले में SC से राहत नहीं मिला. कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि- पहले हाईकोर्ट का फैसला आने दें.  जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पहले 3 जुलाई को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होने दीजिए, राहत नहीं मिलने पर आप यहां आ सकते हैं.

17 मई को SC में टल गई थी सुनवाई

बिहार में जातीय जनगणना पर 17 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई थी. सुनवाई से पहले ही दो जजों की बेंच में एक जस्टिस संजय करोल ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था. बता दें कि, पटना हाईकोर्ट ने 4 मई को अंतरिम आदेश जारी कर जातिगत गणना पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर नीतीश सरकार ने जातिगत गणना पर से रोक हटाने की मांग की थी. पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वी चन्द्रन की बेंच ने हाईकोर्ट में 3 जुलाई को अगली सुनवाई का आदेश दिया था. जिसके बाद राज्य सरकार ने ये मांग की थी की इस मामले की सुनवाई में देरी न हो.

लालू यादव ने ट्वीट कर बीजेपी पर बोला था हमला

  वहीं दूसरी ओर लालू यादव ने भी ट्वीट कर केंद्र सरकार पर हमला बोला था. उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार घड़ियाल की गिनती कर लेती है लेकिन देश के बहुसंख्यक गरीबों, वंचितों, उपेक्षितों, पिछड़ों और अतिपिछड़ों की नहीं? उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर आप को गरीबों पिछड़ों से इतनी नफरत क्यों है”

सात जनवरी से चल रही थी जातीय जनगणना

बिहार में जातिय जनगणना सात जनवरी से चल रहा था. अधिकारी डोर टू डोर जाकर लोगों से उनकी जाति की समीक्षा कर रहे थे. पहले चरण की गणना जनवरी तक चली. जातीय जनगणना को लेकर नीतीश और तेजस्वी हमेशा से एक मत रहे हैं. जब बिहार में एनडीए की सरकार थी, तब भी मुख्यमंत्री ने उस वक्त नेता प्रतिपक्ष रहे तेजस्वी के साथ दिल्ली जाकर पीएम से मुलाकात की थी. हालांकि गणना कराने को लेकर केंद्र कभी भी राजी नहीं हुआ. राज्य सरकार इसे अपने बलबूते करवा रही है. ये भी कारण है कि बीजेपी लगातार हमलावर रहती है.

जनता दरबार में नीतीश कुमार ने दिया था जातीय जनगणना पर बयान

बीते वर्ष जनता दरबार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया को कहा था कि, केंद्र सरकार जातीय जनगणना बिहार में नहीं करा रही, तो हम इसे करा ही देंगे. यहां जाति आधारित जनगणना नहीं कराए जाने का सवाल कहां उठता है. सीएम ने कहा था कि किसी चीज के ऐलान से पहले बेहतर यह है कि सभी लोगों के आइडिया को जान लिया जाए. निर्णय तो हम कैबिनेट से कर सकते हैं, पर चाहते हैं कि सब के साथ बैठकर राय ले ली जाए. नीतीश कुमार ने कहा था कि जाति आधारित जनगणना को लेकर हम कोई क्रेडिट नहीं लेना चाहते. राजनीति में अगर कोई कुछ बोल रहा तो क्या कीजिएगा?

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