Ranchi: झारखंड में मोतियाबिंद ऑपरेशन दर (Cataract Surgical Rate- CSR) राष्ट्रीय औसत से कई गुना ज्यादा है. यह आम नागरिकों के अंधेपन से बचाने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बड़े घोटाले का संकेत है. वर्ल्ड बैंक स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी झारखंड में बढ़े हुए CSR को गंभीर और गड़बड़ी का सेकंत माना है. वर्ल्ड बैंक विजन रिपोर्ट के अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में भी इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
मोतियाबिंद ऑपरेशन दर (CSR) की गणना प्रति एक लाख की आबादी पर किये जाने वाले ऑपरेशन के आधार पर किया जाता है. अंधेपन को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत देश में प्रतिवर्ष 65 लाख लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है. इस हिसाब से भारत में मोतियाबंद ऑपरेशन (CSR) का औसत दर 550-600 है. यानी एक लाख की आबादी पर मोतियाबिंद से प्रभावित औसतन 550-600 लोगों के आंख का ऑपरेशन होता है.
वर्ल्ड बैंक स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने विभिन्न प्रकार की योजनाओं सहित अन्य पहलुओं के अध्ययन के बाद मोतियाबिंद ऑपरेशन दर 800-1000 तक होने की अनुशंसा की है. यानी WHO की अनुशंसा के आलोक में एक लाख की आबादी में से अधिकतम 800-1000 तक लोगों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो सकता है. इससे अधिक ऑपरेशन होने पर योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ का संकेत माना गया है.
झारखंड में मोतियाबिंद ऑपरेशन देश और WHO द्वारा अनुशंसित दर से कई गुना ज्यादा है. झारखंड में सरकारी योजनाओं के तहत किये गये मोतियाबिंद ऑपरेशन की दर 1900-2500 है. यानी झारखंड में एक लाख की आबादी पर 1900 से 2500 लोगों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन होता है. इस स्थिति को देखते हुए झारखंड में इस योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जतायी गयी है.
झारखंड में इससे पहले अलग-अलग अस्पतालों में एक ही व्यक्ति का चार-चार बार मोतियाबिंद का ऑपरेशन किये जाने का मामला प्रकाश में आ चुका है. यह व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं है. लेकिन सरकार के स्तर से ऐसा करने वाले अस्पतालों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी. राज्य में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करना करीब-करीब बंद है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत किये गये मोतियाबिंद के ऑपरेशन के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. झारखंड में मोतियाबिंद का 99 प्रतिशत ऑपरेशन निजी अस्पतालों में होता है.
एक ही आदमी का दो से अधिक बार ऑपरेशन का उदाहरण
| अस्पताल |
ऑपरेशन |
मरीज व पता |
| हाईटेक |
02 |
अब्दुल हफीज, धनवार |
| धनबाद नर्सिंग होम |
01 |
अब्दुल हफीज, धनवार |
| हाईटेक |
03 |
अब्दुल रहीम, 22 बाजार गौशाला धनबाद |
| हाईटेक |
04 |
अलका देवी, झरिया |
| हाईटेक |
03 |
आनंदा गोराई, मोति नगर धनबाद |
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