सीसीएल के बड़का सियाल एरिया में ट्रांसपोर्टरों को दिये गये अनुचित लाभ के बदले सीसीएल के कर्मचारियों द्वारा रिश्वत लेने के मामले की जांच की. इसमें पाया गया कि असिस्टेंट सिक्यूरिटी ऑफिसर संजीव सिंह राहुल कुमार नामक ठेकेदार से उसे दिये गये अनुचित लाभ के बदले रिश्वत लेते थे. वह रिश्वत की रकम अपनी पत्नी के एक्सिस बैंक के अकाउंट नंबर 923010053458020 में जमा करवाते थे.
ठेकेदार राहुल कुमार अपने बैंक अकाउंट नंबर 9180010073413737 से मोबाईल एप के सहारे संजीव की पत्नी के अकाउंट में पैसा जमा करता था. इसके अलावा संजीव की पत्नी के अकाउंट में दूसरे ट्रांसपोर्टरों द्वारा भी नकद राशि जमा की जाती थी.
इडी ने जांच में पाया कि संजीव की पत्नी पुनम देवी के बैंक अकाउंट में राहुल ने पांच बार में पांच लाख 100 रुपये ट्रांसफर किया था. इसके अलावा पुनम देवी के खाते में करीब चार लाख रुपये नकद राशि भी जमा किया गया था. ईडी ने मामले की जांच के दौरान संजीव सिंह से पूछताछ की. इसमें संजीव सिंह ने अपनी पत्नी के खाते में राहुल कुमार द्वारा जमा करायी गयी राशि को कर्ज के रूप में ली गयी रकम बतायी. अपने दावे को सच साबित करने के लिए उन्होंने एक एकरानामा पेश किया.
इसमें राहुल से 5.20 लाख रुपये कर्ज लेने का उल्लेख किया गया था. कर्ज की रकम को एक साल के अंदर लौटाने की शर्त थी. संजीव सिंह ने पूछताछ के दौरान कर्ज की रकम लौटा देने की जानकारी दी. इसके लिए एक लाख रुपये बैंक के माध्यम से और चार लाख रुपये दोस्तों से कर्ज लेने की बात कही. पत्नी के खाते में जमा नकद राशि को पत्नी द्वारा किये गये डेयरी के व्यापार से मिली नकद राशि बतायी.
पूछताछ के बाद ईडी ने राहुल से कर्ज लेने के लिए तैयार किये गये एकरानामे की जांच की. इसमें यह पाया गया कि रामगढ़ नोटरी ने इस एकरारनामे को 23 दिसंबर 2024 को अभिप्रमाणित किया था. जांच में पाया गया कि एकरारनामा से संबंधित दस्तावेज को रामगढ़ डिस्ट्रिक्ट बार एसोसियेशन द्वारा 23 सितंबर 2025 को बेचा गया था. इसलिए 2025 में बेचे गये दस्तावेज पर 2024 में एकरारनामा करने और नोटरी से अभिप्रमाणित कराना संभव नहीं है.
ईडी ने जांच में पाया जिस दिन राहुल और पुनम देवी के बीच एकरारनामा किया हुआ दिखाया गया था, उस दिन दोनों का मोबाईल लोकेशन अलग-अलग था. दोनों का लोकेशन कचहरी के पास नहीं था. यानी कर्ज लेने से संबंधित दस्तावेज फर्जी था. ईडी को जांच के दौरान पुनम देवी के डेयरी में गाय-भैस का कुछ पता नहीं चला. यानी संजीव ने कागजी डेयरी के सहारे कमाई का फर्जी दावा किया.
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