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Ccl News Ramgarh : सयाल कोलियरी में बड़ा खेल, सिर्फ 1506 के रेट पर कंपनियां उठा रही कोयला

Ranchi/Ramgarh: सेंट्रल कोल फिल्ड (सीसीएल) के सयाल कोलियरी में बड़ा खेल चल रहा है. वहां सिर्फ 1506 रुपये प्रति टन की दर पर कोयले की बीडिंग की जा रही है. यह खेल महीनों से चल रहा है. इससे सीसीएल को प्रति माह करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है. ट्रांसपोर्टर्स को करोड़ों की कमाई और राज्य व केंद्र सरकार को टैक्स का नुकसान हो रहा है.

 

जानकारी के मुताबिक सीसीएल के ओल्ड बिरसा, न्यू बिरसा, सयाल, रोहिनी, पुरनाडीह व चुरी कोलियरी से कोयला उठाने के लिए बीडिंग हुई. इसमें ओल्ड बिरसा व चुरी कोलियरी से कोयला खरीद की बीडिंग 4190 रुपये से 4410 रुपये प्रति टन के बीच हुई. जबकि सयाल कोलियरी के लिए 1506 रुपये प्रति टन की बीडिंग हुई. कुल नौ कंपनियों ने एक ही दर पर कोयले की बीडिंग की. यानी कारोबारियों के बीच किसी तरह की प्रतियोगिता हुई ही नहीं है. 

 

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हाल में हुए बीडिंग का रेट.

बताया जाता है कि सीसीएल की ओल्ड बिरसा, चुरी व सयाल कोलियरी का कोयला लगभग एक जैसी है. ओल्ड बिरसा कोलियरी में ग्रेड-6, चुरी कोलियरी का ग्रेड-7 और सयाल कोलियरी में ग्रेड-9 का कोयला है. तीनों के रेट में अमूमन 1500 रुपये से अधिक का फर्क नहीं होने चाहिए. लेकिन उसकी बीडिंग रेट में ढ़ाई हजार रुपये से अधिक का फर्क है. यह सब हो रहा है कुछ कोयला कारोबारियों व सीसीएल के अफसरों की मिलीभगत से.

 

सूत्रों के मुताबिक सयाल कोलियरी से कम कीमत पर बीडिंग करने का खेल पिछले आठ-दस महीने से चल रहा है. दरअसल, कोयले की बीडिंग ऑनलाइन होती है. कोई भी कोयला कारोबारी कहीं से भी अपनी रेट पर बीडिंग कर सकता है. करीब डेढ़ साल पहले कुछ ऐसा किया गया कि ज्यादा रेट पर बीडिंग करने वाले कोयला कारोबारी कोयला का उठाव ही नहीं कर पाया. यानी डिस्टर्ब किया गया. इससे आजीज आकर कारोबारियों ने वहां बीडिंग करना ही बंद कर दिया.

 

जब कारोबारियों ने ऊंची दर पर बीडिंग करना बंद कर दिया, तब एक सिंडिकेट में शामिल करीब दर्जन भर कंपनियों ने कम रेट पर बीडिंग करके कोयला उठाना शुरु किया है. इससे कारोबारियों को तो करोड़ों रूपये अधिक कमाई हो रही है, अफसरों की भी मोटी कमाई हो रही है, लेकिन सीसीएल और सरकार को बड़ा नुकसान हो रहा है.

 

जानकारी मिली है कि करीब एक दर्जन कंपनियां हैं, जिन्होंने सिंडिकेट बना रखा है. सिंडिकेट बनाने में पप्पू नामक कारोबारी का सबसे बड़ा योगदान है. यही काम अब दूसरी कोलियरियों में भी करने की तैयारी है. इन्हें सहयोग मिलता है कोलियरी के दबंगों का. सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में सीसीएल विजिलेंस कार्रवाई करती है, लेकिन सयाल कोलियरी के मामले में कार्रवाई ना होने से कोयला कारोबारी हतप्रभ हैं. 

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