National News : NEET परीक्षा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और फुलप्रूफ है. इसमें सेंध लगाना मुश्किल है. पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा सेंटर में पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीयता रखी जाती है. आज बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के क्रम में यह दलील दी.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सलाह दी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) UPSC जैसा मजबूत परीक्षा सिस्टम बनाये. कहा कि नयी टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाले अधिकारियों को इसमें शामिल करना चाहिए. यह भी सलाह दी कि अनुभवी अधिकारियों का बार-बार ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए.
बता दें कि जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने आज यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA सहित अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की. याचिका में NTA को भंग करने के अलावा पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम तैयार करने की मांग की गयी है.
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सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने बाद फिर दोहराया, NTA UPSC की तरह ऐसा मजबूत सिस्टम बनाये. जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को समझाया कि कागज पर प्रक्रिया बेहतर जरूर दिख सकती है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि एक परीक्षा के बाद अगली परीक्षा तक व्यवस्था में पुरानी कमजोरियां न दोहराई जाये.
SG तुषार मेहता ने कोर्ट को परीक्षा सिस्टम की जानकारी दी. उदाहरण दिया कि फिजिक्सके 100 मार्क्स के एक पेपर के लिए कई मॉडरेटर से 500 सवालों का क्वेश्चन बैंक बनाने को कहा जाता है. मॉडरेटर का दूसरा सेट 100-100 सवाल चुनता है और 4 क्वेश्चन पेपर बनाता है. इस क्रम में चार क्वेश्चन पेपर में से DG NTA सिर्फ दो क्वेश्चन पेपर चुनता है.
उस समय तक किसी को जानकारी नहीं होती कि कौन सा आखिरी क्वेश्चन पेपर होगा. उसके बाद क्वेश्चन पेपर एक सीलबंद बॉक्स में दो अलग-अलग प्रिंटर के पास भेजा जाता है. प्रिंटर में CCTV और CISF सर्विलांस होता है. वह व्यक्ति एक बॉक्स में डिजिटल चाबी लेकर जाता है. उसके वहां पहुंचने पर प्रिंटिंग प्रेस का मालिक DG NTA को कॉल करता है कि पेपर पहुंच गया है.उसके बाद कोड शेयर किया जाता है और उसे खोला जाता है.
SG तुषार मेहता ने कहा कि एक बार सीलबंद बॉक्स खुलने के बाद कोई बाहरी व्यक्ति प्रिंटिंग प्रेस में नहीं जा सकता. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है. नियम यह है कि हर क्लासरूम में 24 स्टूडेंट होंगे. OMR के साथ क्वेश्चन पेपर एक सीलबंद लिफाफे में बंद है, लिफाफा खोलने के लिए सील तोड़नी होगी. प्रिंटर को भी नहीं पता कि वह किस एग्जाम के लिए पेपर प्रिंट कर रहा है. उसे नहीं पता कि पेपर किस एग्जाम के हैं.
SG तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि हर एग्जाम सेंटर को पैक्ड क्वेश्चन पेपर भेजे जाते हैं. पेपर एक लोहे के बॉक्स में पैक किये जाते है. उसमें एक नॉन-ओपनेबल लॉक होता है. इसे सिर्फ तोड़ कर खोला जा सकता है. इसमें कोई चाबी या कोई डिजिटल नंबर नहीं होता, जिस वाहन में क्वेश्चन पेपर होते हैं, वह GPS ट्रैक्ड होती है. दो अलग-अलग बॉक्स में क्वेश्चन पेपर के दो सेट होते हैं. बॉक्स बैंकों के स्ट्रांग रूम में रखे जाते हैं.
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