- राज्य गठन के बाद से यह पहला मौका है, जब केंद्र ने झारखंड को वित्तीय वर्ष के पहले चार महीने में एक भी पैसा नहीं दिया है.
Ranchi News: केंद्र सरकार ने MMDR Act में संशोधन कर झारखंड को खनिजों पर मिलने वाला सेस तो बंद कर हीदिया. इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष का चार महीना गुजरने के बाद भी केंद्रीय अनुदान मद में पैसा नहीं दिया है. इससे झारखंड सरकार के सामने आर्थिक परेशानियां पैदा हो गयी है.
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार मिला था. सुप्रीम कोर्ट ने MADA केस की सुनवाई के बाद राज्यों के खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार दिया था. 2024 को दिये गये अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पहली अप्रैल 2005 की तिथि से खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार दिया था. साथ ही बकाये की वसूली किस्तों में करने की अनुमति दी थी. इसके बाद सरकार ने The Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act 2024 बनाकर लागू किया.
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सरकार ने अक्टूबर 2024 में गजट जारी कर इसे लागू किया. सरकार ने पहले दौर में कोयला पर 100 रुपये टन, लौह अयस्क पर 100 रुपये प्रति टन की दर से सेस (CESS) लगाया. सरकार ने लघु खनिजों पर सेस लगाया. इससे वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार के सेस के रूप में 1380 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी. 2025-26 में सरकार ने सेस की दरों में संशोधन किया. इससे 2025-26 में सेस से सरकार को 7487.91 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी.
सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के दौरान खनिजों पर लगने वाले सेस से 13800 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान किया था. लेकिन केंद्र सरकार ने MMDR Act में संशोधन कर राज्यों के खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार को समाप्त कर दिया. इससे झारखंड को खनिजों पर लगाये गये सेस से होने वाली आमदनी बंद हो गयी. केंद्र सरकार MMDR Act में संशोधन का गजट प्रकाशित कर दिया गया है. गजट प्रकाशित होने से पहले तक सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 4734.28 करोड़ रुपये की राशि मिली है.
केंद्र सरकार द्वारा MMDR Act में किये गये संशोधन के बाद राज्य सरकार खनिजों पर लगाये गये सेस की वसूली नहीं कर सकती है. इसके अलावा वह बकाये राशि की भी वसूली नहीं कर सकती है. इससे राज्य सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के दौरान खनिजों पर लगाये गये सेस के रूप में एक भी पैसा नहीं मिलेगा.
इन सबके बीच ताजा मामला केंद्रीय अनुदान का सामने आया है. केंद्र सरकार राज्यों को हर साल केंद्रीय अनुदान देती है. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य सरकार को केंद्रीय सहायता के रूप में 18214.38 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था. लेकिन केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीने (अप्रैल-जुलाई) तक की अवधि में अनुदान मद में एक भी पैसा नहीं दिया है. राज्य गठन के बाद से यह पहला मौका है, जब केंद्र ने झारखंड को वित्तीय वर्ष के पहले चार महीने में एक भी पैसा नहीं दिया है. इससे पहले तक राज्य को नियमित रूप से केंद्रीय अनुदान मिलता रहा है. भले ही वह निर्धारित लक्ष्य से कम रहा हो.
पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) सरकार ने केंद्रीय अनुदान के रूप में 17057.10 रुपये मिलने का अनुमान किया था. लेकिन केंद्रीय अनुदान मद में सिर्फ 12079.55 करोड़ रुपये ही मिले थे. सरकार को अपने 2026-27 के सालाना लक्ष्य के मुकाबले, पहले चार महीने में सिर्फ 19.19% राजस्व मिल सका है. इससे राज्य सरकार की आर्थिक परेशानियां बढ़ गयी हैं.
2026-27 में जुलाई तक सरकार की आमदनी (करोड़ में)
| राजस्व मद | लक्ष्य | मिला | उपलब्धि |
| जीएसटी | 20937.27 | 3893.56 | 18.6% |
| स्टाप व निबंधन | 1800.00 | 548.64 | 30.48% |
| भू-राजस्व | 1999.03 | 125.73 | 6.29% |
| वैट | 7899.73 | 2293.96 | 29.04% |
| उत्पाद | 4499.73 | 1377.38 | 30.61% |
| केंद्रीय करों में हिस्सा | 51236.96 | 5009.35 | 32.88% |
| केंद्रीय अनुदान | 18214.38 | 00.00 | 0% |
गौरतलब है कि सेस वसूलने पर रोक के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था. जिसमें सेस वसूली पर रोक को खत्म करने की मांग की थी. साथ ही मुख्यमंत्री ने यह इस मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी थी. जिसके बाद से राज्य भर में झामुमो और कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता इसे लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
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