- प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले काम करना, पालतू जानवरों को लाना, कैंपिंग और ट्रैकिंग करने की इजाजत नहीं होगी.
- केंद्र सरकार ने बनायी समिति, कहा- राज्य सरकार समिति में जैन समुदाय से दो सदस्य शामिल करे.
- स्थानीय जनजातीय समुदाय से भी एक सदस्य शामिल करे.
- 2019 की अधिसूचना पर राज्य कार्रवाई करे.
Met Jain community members who have been urging to protect the sanctity of Sammed Shikhar.
Assured them that PM Shri @narendramodi">https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi
ji’s government is committed to preserving and protecting the rights of Jain community over all their religious sites, including Sammed Shikhar. pic.twitter.com/MrxiB616PE">https://t.co/MrxiB616PE">pic.twitter.com/MrxiB616PE
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) January">https://twitter.com/byadavbjp/status/1610961140196200448?ref_src=twsrc%5Etfw">January
5, 2023
केंद्रीय मंत्री के साथ हुई जैन समाज की बैठक
देशभर में जैन समाज के लोग आंदोलन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने के फैसले को वापस लिया जाए. क्योंकि वहां मांस और शराब की बिक्री होने लगी है. इसे लेकर जैन समाज के तमाम पदाधिकारियों ने पर्यटन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. जिसके बाद उन्होंने जैन समाज को भरोसा दिलाया कि उनकी धार्मिक भावनाओं का खयाल रखा जाएगा.
जैन समाज ने खत्म किया आंदोलन
पारसनाथ मामले में केंद्र सरकार ने समिति बनाई है. इसे लेकर कहा गया है कि राज्य सरकार समिति में जैन समुदाय से दो सदस्य शामिल करे. स्थानीय जनजातीय समुदाय से भी एक सदस्य शामिल करे. कहा गया है कि 2019 की अधिसूचना पर राज्य कार्रवाई करे. पर्यटन, इको टूरिज्म गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी गई है. इस फैसले के बाद जैन समाज का आंदोलन खत्म हो गया है. पालीताना जैन तीर्थ के प्रमुख ने कहा कि भूपेंद्र यादव से मुलाकात हुई, उसके बाद सभी समस्याओं का समाधान हो गया है. जो हमारी मांग थी, उसे मान लिया गया है.
alt="" width="650" height="540" />
इन चीजों पर लगी पाबंदी?
केंद्रीय मंत्री की तरफ से इसे लेकर पूरा ज्ञापन भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है, जिसमें बताया गया है कि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र में ड्रग्स और तमाम नशीले पदार्थों की बिक्री करना, तेज संगीत बजाना, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना, प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले काम करना, पालतू जानवरों को लाना, कैंपिंग और ट्रैकिंग करने की इजाजत नहीं होगी. इन सभी नियमों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं.
क्या है पूरा मामला
साल 2019 में केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखरजी को ईको पर्यटन स्थल घोषित करने का एलान किया था. इसकी सिफारिश झारखंड सरकार की तरफ से की गई थी. जिसके बाद फरवरी 2022 में राज्य सरकार ने इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दी और सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया गया. इस दौरान पर्यटन स्थल के आसपास शराब और मांस की दुकाने खोलने की भी इजाजत दे दी गई, जिसके बाद पूरा विवाद शुरू हुआ और जैन समाज ने आंदोलन खड़ा कर दिया.
सीएम हेमंत सोरेन ने मंत्री भूपेंद्र यादव को लिखा था पत्र
इससे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सम्मेद शिखरजी तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने और स्थल से संबंधित उचित निर्णय लेने के संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा था. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने झारखंड सरकार को ज्ञापन जारी कर कहा कि सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र जैन धर्म का विश्व का सबसे पवित्र एवं पूजनीय तीर्थ स्थान है. सरकार जैन समुदाय के साथ-साथ राष्ट्र के लिए इसकी पवित्रता और महत्व को पहचानती है और इसे बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है.
इसे भी पढ़ें – भारत">https://lagatar.in/campuses-of-foreign-universities-will-open-in-india-m-jagadish-kumar/">भारत
में खुलेंगे फॉरेन यूनिवर्सिटीज के कैंपस : एम जगदीश कुमार [wpse_comments_template]
में खुलेंगे फॉरेन यूनिवर्सिटीज के कैंपस : एम जगदीश कुमार [wpse_comments_template]

Leave a Comment