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चाईबासा : ईचा खरकई बांध विरोधी संघ खतियानी यात्रा में सीएम को दिखायेंगे काला झंडा

 
Chaibasa (Sukesh Kumar) : सदर प्रखंड के तुईबीर पंचायत के राजस्व ग्राम बरकुंडिया में ईचा खरकई बांध विरोधी संघ ने हजारों ग्रामीणों की उपस्थिति में रविवार को सीएम हेमंत सोरेन, परिवहन मंत्री चंपई सोरेन, विधायक दीपक बिरूवा और मंझगांव विधायक निरल पूर्ति का पुतला दहन किया. संघ ने हेमंत सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि 126 गांव के रैयतों और विस्थापित आदिवासी मूलवासियों को सरकार ने छलने का काम किया है. चुनाव से पूर्व कोल्हान में बदलाव यात्रा कर हेमंत ने बड़े-बड़े वादे किये थे और चुनावी मुद्दे में कुजू डैम को रद्द करने की बात कही थी. लेकिन सरकार बनने के तीन साल बाद भी किसी सत्र में कोई विधायक या मंत्री ने कुजू डैम की चर्चा तक नहीं की. अब मुख्यमंत्री किस मुंह से कोल्हान की वीर भूमि में खतियानी यात्रा कर रहे हैं. ये हेमंत सोरेन की खतियानी यात्रा नहीं बल्कि विस्थापन यात्रा है. इसे भी पढ़े : पिकनिक">https://lagatar.in/death-shivam-a-young-man-who-went-on-a-picnic-father-alleges-that-friends-pushed-him-to-death/">पिकनिक

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क्षेत्र के विधायक पर लगाये कई गंभीर आरोप

संघ के सदस्यों ने कहा कि मंत्री चंपई सोरेन खुद को झारखंड टाइगर कहते है पर डैम के मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं. डैम का स्वरूप बदल कर सिंचाई सुविधा देने की वकालत करते हैं. उनके सुपुत्र ईचा खरकई बांध परियोजना के योजनाओं में ठेकेदारी करते है. रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं तो उम्मीद किससे की जा सकती है. सदर विधायक दीपक बिरूवा भी कॉरपोरेट के कटपुतिली बन कर रह गए हैं. विस्थापितों की आवाज तो दूर विस्थापित क्षेत्र में जाना भी जरूरी नहीं समझते. मंझगांव विधायक निरल पूर्ति को डूब क्षेत्र से कोई लेना देना ही नहीं है. इसे भी पढ़े : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-congress-youth-jodo-booth-jodo-program-organized-in-guava/">नोवामुंडी

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अलग-अलग गांव में किया जाएगा पुतला दहन

सोमवार को अलग-अलग गांव में विधायक, मुख्यमंत्री और मंत्री का सिलसिलेवार पुतला दहन किया जाएगा. खतियानी यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को काला झंडा दिखा कर कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा. संघ सरकार से मांग करती है कि यथाशीघ्र कुजू डैम को रद्द करें. पुतला दहन में मुख्य रूप से दियूरी सतीश चन्द्र बुड़ीउली, गुलिया कुदादा, गणेश बुड़ीउली, सनातन बुड़ीउली, जयकिशन बिरूली, बिर सिंह बिरूली, विश्वनाथ बरजो, डोबरो बुड़ीउली, गोसा कुदादा, सुभाष बुड़ीउली, गुलशन बुड़ीउली के ग्रामीण और विस्थापित उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
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