: हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा वही सामान्य वर्ग की जनसंख्या इस जिले में लगभग 1-2 फीसदी के आसपास है फिर भी ईडब्ल्यूएस को पश्चिम सिंहभूम के साथ-साथ सभी 24 जिलों में 10-10 फीसदी आरक्षण दिया गया है. जबकि पूरे झारखंड की जनसंख्या को अगर देखें तो सामान्य वर्ग की जनसंख्या लगभग 5 फीसदी है और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या लगभग 40 फीसदी है. फिर भी पिछड़ा वर्गों को 7 जिलों में आरक्षण सुनने कर दिया गया है. इसलिए यह आरक्षण रोस्टर किसी भी प्रकार से तर्कसंगत और न्याय संगत नहीं हो सकता.
पिछड़े वर्गों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप
आजादी के बाद से आज तक पिछड़ा वर्ग इसी प्रकार से सभी राजनीतिक दलों ने बारी-बारी से ठगने का काम किया है. क्योंकि पिछड़ा वर्गों की जनगणना नहीं की जाती है और पिछड़े वर्ग की जनसंख्या सामने नहीं आने के कारण राज्य की बड़ी आबादी को जानबूझकर अपने अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है. इसीलिए आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया सरकार से मांग करता है कि सर्वप्रथम झारखंड सरकार को राज्य स्तर पर बिहार के तर्ज पर जातीय जनगणना करना चाहिए इसके बाद ही जनसंख्या के अनुपात में सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होती है तो आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा. रामहरि गोप ने कहा कि सभी बड़े राजनीतिक दलों ने पिछड़े वर्गों को हमेशा से अधिकारों से वंचित रखा और वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-crpfs-e-26th-battalion-inaugurates-six-day-stress-management-course/">किरीबुरू: सीआरपीएफ के ई/26वीं बटालियन ने छः दिवसीय स्ट्रेस मैनेजमेंट कोर्स का किया शुभारम्भ [wpse_comments_template]

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