Chaibasa (Sukesh Kumar) : विश्व नदी दिवस हर वर्ष सितंबर महीने के चौथे रविवार को मनाया जाता है. इसी क्रम में कई स्थानों पर रविवार को कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ. इधर, विश्व नदी दिवस के अवसर पर कोल्हान विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ एमएन सिंह ने नदियों में लगातार घट रहे जल स्तर पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि वर्तमान समय में नदियों से बालू का अधिक मात्रा में खनन हो रहा है जिसके कारण नदी अब सुरक्षित नहीं रहा. यदि इस पर अभी से ही नियंत्रण नहीं किया गया तो यह खतरनाक हो जाएगा. आने वाले दिनों में नदी की धार कट जाएगी और गांव की तरफ नदी रुख कर लेगी. इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-ajsus-guwa-eastern-panchayat-committee-constituted/">नोवामुंडी
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alt="" width="600" height="400" /> पॉलिटिकल साइंस के सहायक प्रोफेसर डॉ एमएन सिंह[/caption]
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: आजसू के गुवा पूर्वी पंचायत कमेटी का किया गया गठन [caption id="attachment_429579" align="aligncenter" width="600"]
alt="" width="600" height="400" /> पॉलिटिकल साइंस के सहायक प्रोफेसर डॉ एमएन सिंह[/caption]
नदियों में फेंके जा रहे कूड़ा करकट के कारण नदियां हो रही प्रदूषित
डॉ एमएन सिंह ने कहा कि चाईबासा क्षेत्र से गुजरने वाले स्वर्णरेखा नदी रोरो नदी व कोयल कारो नदी का भी जलस्तर घट जाता है. जिसका मुख्य कारण है अधिक मात्रा में बालू का खनन होना इसे रोक लगाने की जरूरत है. वैसे इस दिवस की शुरुआत 2005 में हुई थी उसी साल पहला विश्व नदी दिवस मनाया गया था और तभी से आज तक हर साल यह मनाया जाता है. नदियों के बारे में जन जागरुकता बढ़ाने के लिए और उनके संरक्षण पर ध्यान देने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है. नदियों में फेंके जा रहे कूड़ा करकट नदियों के पानी को दूषित करता है. वह उसमें रह रहे जीवों को भी नुकसान पहुंचा रहा है. ये नदियां ही हैं जो कई लोगों, शहरों के जीवन का साधन है.
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भारत में 400 से अधिक नदियां
भारत की बात करें तो यहां 400 से अधिक नदियां है जिसमें से 8 नदियां भारत की सबसे बड़ी नदियां है. इन नदियों के माध्यम से सिचांई आदि जैसे न जाने कितने कार्य किए जाते हैं. ऐसे में जब हम फायदे के लिए इनका उपयोग करते हैं तो ये हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम इनकी स्वच्छाता पर भी उतना ही ध्यान दें. लगातार बढ़ रहे जल प्रदुषण के कारण उसमें रहने जल जीव को नुकसान पहुंचता है. इतना ही नहीं नदियों का पानी ही होता है जो सभी के घरों में साफ होकर आता है. हम सभी अपने जीवन के लिए नदियों पर निर्भर रहते हैं. लेकिन हम इन नदियों के लिए कभी कुछ नहीं करते हैं. हर साल एनजीओ आदि द्वारा नदियों की सफाई में लाखों टन का कचरा निकाल उसे साफ करने का प्रयत्न किया जाता है. इसे भी पढ़ें : बंदगांव">https://lagatar.in/bandgaon-former-chief-minister-madhu-koda-held-a-meeting-with-congress-workers/">बंदगांव: पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने की कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक
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