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चाईबासाः कस्तूरबा विद्यालयों व BRC के लिए लैपटॉप की खरीद में बड़ा घोटाला

शिक्षा विभाग का कारनामाः 45 हजार का लैपटॉप 72 हजार में खरीदा 

Manish Singh

Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के शिक्षा विभाग में लगातार घोटालों की बात सामने आ रही है. पीएमश्री विद्यालयों के लिए सामग्री की खरीद में अनियमितता का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि दूसरे घोटाले का मामला प्रकाश में आ गया है. इस बार जिले के कस्तूरबा विद्यालयों व बीआरसी के लिए महंगे दाम पर लैपटॉप खरीदने की बात सामने आई है. 45 हजार रुपये के लैपटॉप को 72 हजार रुपये में खरीदा गया है. यही नहीं, एक ही दुकान से जिले भर के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों व बीआरसी के लिए लैपटॉप खरीदे गये हैं. वरीय अधिकारियों की मिलीभगत से लैपटॉप की खरीदारी में अनियमितता की बात सामने आ रही है.

जानकारी के अनुसार, जिले भर के कस्तूरबा विद्यालयों व बीआरसी के लिए कुल 24 लैपटॉप की खरीद हुई है. इसके लिए कुल करीब 17 लाख 34 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया गया है. जो बाजार मूल्य से करीब 6 लाख 42 हजार रुपये अधिक है. इसी प्रकार प्रत्येक प्रिंटर के लिए लगभग 5 हजार रुपये अधिक का भुगतान किया गया. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी राशि की किस तरह लूट की गई है. सूत्रों के अनुसार, इस खरीदारी में जिला शिक्षा परियोजना के एक एकाउंटेंट व एक प्रखंड के बीआरसी के एकाउंटेंट ने मुख्य भूमिका निभाई है. ऐसा शिक्षा विभाग के एक वरीय अधिकारी के इशारे पर किया गया है. इस खरीद मामले में कमीशनखोरी हुई है या दुकानदार द्वारा बड़ा फायदा पहुंचाया गया है, यह जांच का विषय है.

ऐसे की गई गड़बड़ी

कस्तूरबा विद्यालयों व बीआरसी के लिए बनाये गये वाट्सएप ग्रुप में आदेश भेजा गया कि कस्तूरबा विद्यालयों के लिए एक ऑफिस लैपटॉप की खरीद करनी है. कैपेसिटी बिल्डिंग हेड से खरीद का बजट 50 से 70 हजार रुपये (प्रति पीस) के बीच रखने का जिक्र था. सूत्रों के अनुसार, इस मैसेज के साथ एक अदृष्य दबाव आया कि लैपटॉप चाईबासा की ही कंप्यूटर जोन नामक दुकान से खरीदारी करनी है. खरीदारी लगभग 17 लाख रूपये से अधिक की करनी थी, इसलिए प्रत्येक स्कूल को अपने स्तर से खरीदारी करने को कहा गया. ताकि राशि टुकड़ों में बंट जाए और निविदा प्रक्रिया का झंझट ना रहे. जिस कंप्यूटर दुकान से खरीदारी करनी थी, उसके द्वारा सभी स्कूलों को तीन अलग-अलग कोटेशन उपलब्ध कराए गए और खुद की दुकान के कोटेशन में दर अन्य दो की तुलना में कम रखी गई. इसी आधार पर स्कूलों द्वारा वर्क ऑर्डर उक्त दुकानदार को दे दिया गया. उक्त दुकानदार द्वारा एचपी ब्रांड के 45 हजार रुपये के लैपटॉप को 72250 रुपये में बेचा गया.वहीं लैपटॉप के साथ ज्यादा दाम पर प्रिंटर भी उसी दुकानदार द्वारा बेचा गया.जबकि खुले मार्केट में उक्त लैपटॉप (मॉडल नंबर एचपी.15एस-एफक्यू5329टीयू) की कीमत मात्र 45500 रुपये है. वहीं, प्रिंटर की कीमत ऑपन मार्केट में 17800 रुपये है. इसकी जानकारी तब हुई जब Lagatar.in के रिपोर्टर ने चाईबासा की अन्य दो दुकानों पर जाकर उक्त मॉडल के लैपटॉप का कोटेशन लिया.

वरीय अधिकारियों के इशारे पर हुई खरीदारी 

पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए लैपटॉप की खरीदारी की गई है. सभी प्रखंडों के विद्यालयों ने अपने आसपास की दुकानों को छोड़ चाईबासा की दुकान कंप्यूटर जोन से खरीदारी की है, इसलिए संदेह और बढ़ जाता है. जबकि प्रत्येक स्कूल को अपने स्तर से अच्छे ब्रांड के लैपटॉप की खरीदारी करने का आदेश दिया गया था. मजेदार बात यह है कि विद्यालयों को भले ही अपने स्तर से लैपटॉप की खरीद करने का आदेश जारी किया गया, लेकिन एक निश्चित दुकान से खरीदारी के लिए दबाव भी बनाया गया, जिससे विद्यालयों की मर्जी नहीं चली. यही वजह है कि विद्यालय प्रबंधन भी चुप्पी साधे हुये हैं.

मामले की जांच कराएंगे : डीईओ

लैपटॉप व प्रिंटर की खरीद में अनियमितता के संबंध में पूछे जाने पर पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) टोनी प्रेमराज टोप्पो ने कहा कि फिलहाल इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है. उन्होंने कहा कि स्कूलों की आवश्यकता के आधार पर लैपटॉप की खरीदारी हुई है. अगर लैपटॉप एक ही दुकान से ज्यादा दाम पर खरीदे गए हैं, तो मामले की जांच कराई जाएगी.

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