Chaibasa (Sukesh Kumar) : पश्चिमी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) नीरजा कुजूर को डीएसई का अतिरिक्त प्रभार मिलने पर एक चुनौती बन गई है. कोविड-19 कार्याकाल के दौरान जिले के सभी स्कूलों में बायोमैट्रिक्स सिस्टम को बंद कर दिया गया था. इसके बाद सरकार ने उसे दोबारा शुरू करने का आदेश दिया था. लेकिन अब तक उक्त सिस्टम के तहत शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं होती है. इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय के कुछ शिक्षकों द्वारा खानापूर्ति हो रही है. समय पर शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच रहे है. डीएसई का प्रभार मिलने के बाद संभवत: शत-प्रतिशत बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू हो सकती है. मालूम हो कि में जिले में लगभग दो हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं. लेकिन अधिकतर शिक्षक समय पर स्कूल नहीं जाते हैं. इसे भी पढ़े : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-due-to-overnight-rain-jhanda-maidan-started-looking-like-a-pond/">गिरिडीह
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डीएसई सुनील चौधरी का कर दिया गया स्थानांतरण
जिले के पूर्व के डीएसई सुनील चौधरी का स्थानांतरण पलामू के डीईओ के रूप में कर दिया गया है. इसके बाद पश्चिम सिंहभूम जिले में डीएसई के पद पर अजय तोपनो का स्थानांतरण किया गया था. लेकिन अब तक उनके कार्यभार ग्रहण नहीं करने से विभाग की बहुत सारी फाइलें पेंडिंग पड़ी हुई थी. खासकर कर्मचारियों के वेतन को लेकर विशेष समस्या हो रही थी. इस कारण सारी चीजों को देखते हुए नीरजा कुजूर को पश्चिम सिंहभूम जिले का डीएसई का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. साथ ही उन्हें झारखंड कोषागार संहिता 2016 के नियम 87 के तहत उन्हें निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया है. इसे भी पढ़े : किरीबुरु:">https://lagatar.in/kiriburu-sbis-link-has-failed-for-four-days-due-to-thunderstorm-all-work-has-come-to-a-standstill/">किरीबुरु:वज्रपात के कारण चार दिन से फेल है एसबीआई का लिंक, तमाम कामकाज ठप [wpse_comments_template]
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