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चाईबासा : सिंहभूम संसदीय क्षेत्र के वोटरों का नब्ज पकड़ना भाजपा के लिए है बड़ी चुनौती

Chaibasa (Sukesh Kumar) : 7 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चाईबासा आने वाले है. उनकी सभा टाटा कॉलेज चाईबासा में आयोजित होगी. गृहमंत्री की सभा को सफल बनाने के लिए सूबे के पार्टी प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री प्रदेश प्रभारी, जिला अध्यक्ष सहित सभी पार्टी के वरीय नेतागण लगे हुए है. पार्टी सूत्रों के अनुसार 2024 के आम चुनाव की तैयारी का आगाज कोल्हान के सिंहभूम संसदीय सीट से हो रहा है और इस कार्यक्रम के बाद लगातार गृह मंत्री पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा पर होंगें. जिसके लिए भाजपा हाईकमान ने कार्यक्रम की घोषणा भी कर दी है. सिंहभूम संसदीय क्षेत्र की बात की जाय तो यहां से कांग्रेस, झामुमो, राजद महागठबंधन की उम्मीदवार गीता कोड़ा सांसद है. वह जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक निर्वाचित हुई है और वह पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी हैं. यहां लोकसभा सीट के वोटरों का नब्ज पकड़ना भाजपा के लिए काफी चुनौती साबित होने वाला है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-police-arrested-two-members-of-interstate-vehicle-thieves-gang/">चांडिल

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2018 में सांसद गीता कोड़ा 50,000 के अंतर से जीत चुकी हैं चुनाव 

2018 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया. भाजपा के लक्ष्मण गिलुवा को पराजित कर वह सांसद बनी थी और लगभग 50 हजार के अंतर से चुनाव जीती थी. भाजपा के बड़े नेताओं का बयान इस समय लोगों के मन में तैर रहा है. जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गृह मंत्री की सभा को सफल बनाने के लिए चाईबासा में बैठक करते हुए कहा है कि कुछ पुराने साथियों को फिर से पार्टी में शामिल कराने की कोशिश की जा रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-fir-against-unknown-in-newborn-seizure/">जमशेदपुर

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मधु कोड़ा भाजपा में रह चुके मंत्री, पुराने साथी को वापस लाने की कवायद तेज 

बाबूलाल मरांडी के उस बयान के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है. आखिर बाबूलाल के पुराने दोस्तों में से कौन-कौन लोग है. इनमें सबसे पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का आता है. बाबूलाल की सरकार में मधु कोड़ा खनन, ग्राम्य सड़क संगठन, पंचायती राज विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री रह चुके है. एक बार रजरप्पा में मधु कोड़ा दुर्घटना के शिकार हो गए थे जिसमें वे गंभीर रूप से चोटिल हुए थे. उस समय भी बाबूलाल मरांडी के तत्परता से मधु कोड़ा का बेहतर इलाज हुआ था. साथ ही 1980 के दशक में भाजपा को सींचने वाले भाजपा के प्रथम सांसद चित्रसेन सिंकू से भी बाबूलाल मरांडी के बेहतर संबंध रहे है. दोनों लंबे समय तक भाजपा को स्थापित करने के लिए साथ-साथ काम कर चुके है. बाबूलाल के पुराने साथियों में जगन्नाथपुर के पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा का नाम शामिल है. बाबूलाल मरांडी जब भाजपा छोड़ झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया था तब उन्होंने मंगल सिंह बोबोंगा को सिंहभूम संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था. साथ ही जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधानसभा का उम्मीदवार बनाया था. वर्तमान में बोबोंगा ने किसी भी राजनीतिक दल से नाता नहीं जोड़ा है. इन तीनों के साथ बाबूलाल की नजदीकियों को लेकर तरह-तरह की चर्चा चल रही है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-farmer-friends-were-told-how-to-protect-kharif-crops-from-cold/">चाईबासा

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सांसद गीता कोड़ा के खिलाफ में हैं कुछ कार्यकर्ता

सिंहभूम संसदीय क्षेत्र की वर्तमान सांसद गीता कोड़ा लोकप्रिय तो है. लेकिन विगत कई वर्षों में उनके खिलाफ उनके ही दल के कुछ नेता कार्यकर्ताओं ने बिगुल फूंक रखा है. राज्य सरकार की ओर से बीस सूत्री कार्यक्रम की अनुश्रवण और निगरानी के लिए जिला और प्रखंड की सूची जारी की गई. जिसमें जिला के किसी अल्पसंख्यक को सदस्य नहीं बनाया गया तो अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं द्वारा सांसद का पुतला दहन तक किया गया था. उसी तरह से आदिवासी बहुल जिला में पार्टी अध्यक्ष किसी आदिवासी को नहीं बनाकर ओबीसी जिला अध्यक्ष मनोनीत होने पर भी नाराज आदिवासी कार्यकर्ताओं द्वारा उनका पुतला दहन किया गया था. ऐसे में लोकसभा चुनाव में जीत की राह गीता कोड़ा के लिए आसन नहीं है. राजनीतिक वातावरण पर गौर किया जाए तो यह स्पष्ट बोलना जल्दबाजी है कि आसन्न लोकसभा चुनाव किस ओर करवट लेगा. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-cyber-criminal-duped-chicken-businessman-by-posing-as-indian-army-officer/">किरीबुरु

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लक्ष्मण गिलुवा के निधन के बाद सिंहभूम संसदीय सीट है खाली

हालांकि लक्ष्मण गिलुवा के निधन के बाद सिंहभूम संसदीय क्षेत्र से भाजपा का उम्मीदवार कौन बनेगा यह अभी स्पष्ट नहीं है. जबकि जिला में भाजपा के कई कद्दावर नेता है. पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई सिंहभूम संसदीय क्षेत्र से पहले भी उम्मीदवार बनाए गए थे. लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था. हालांकि अब फिर से वे पार्टी में शामिल हो गए है. राज्य के पूर्व गृह सचिव आईएएस जेबी तुबिद भी चाईबासा विधानसभा क्षेत्र से दो बार भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए. लेकिन वे जितने में सफल नहीं रहे. उनका नाम भी लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार के रूप में सामने आ रहा है. इसी तरह से भाजपा के अन्य जवाहरलाल बानरा, पुतकर हेंब्रम का नाम शामिल है, जो पूर्व विधायक है. जो हो सिंहभूम संसदीय क्षेत्र में आदिवासी "हो उपजाति" की बहुलता है ऐसे में जातीय समीकरण काफी मायने रखता है. राजनीतिक समीकरण झामुमो द्वारा भी प्रभावित होती है. जहां इस संसदीय क्षेत्र के सभी छह विधानसभा सीट पर महागठबंधन उम्मीदवार के विधायक है. इसलिए भाजपा के लिए भी सिंहभूम संसदीय सीट बहुत आसान नहीं कहा जा सकता. [wpse_comments_template]

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