Chaibasa (Sukesh kumar) : झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से मंगलवार को इंटरमीडिएट साइंस का परिणाम जारी कर दिया
गया. लेकिन पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए इस बार साइंस का परिणाम निराशाजनक
रहा. पिछले साल की तुलना में इस वर्ष
17% विद्यार्थी इंटरमीडिएट साइंस में फेल
हुए. पिछले साल 87.66 प्रतिशत विद्यार्थी साइंस में पास हुए
थे. जबकि इस साल 70.28 प्रतिशत विद्यार्थी ही सफल
हुए. पश्चिमी सिंहभूम का परिणाम निराशाजनक होने से जिला शिक्षा विभाग की ओर से अब समीक्षा करने की योजना बनाई जा रही
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: सरकारी स्कूलों में वॉलिंटियर्स के सहयोग से चलेंगे समर कैंप अधिकतर विद्यार्थी प्राइवेट स्कूल के हुए सफल
बताया गया कि अधिकतर विद्यार्थी प्राइवेट स्कूल के ही सफल हुए
हैं. सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का परिणाम खास नहीं रहा
है. मालूम हो कि इस तरह का परिणाम 6 साल पूर्व पश्चिमी सिंहभूम में हुआ
था. लेकिन 6 साल में बहुत कुछ सुधार हुआ
था. लेकिन दोबारा इंटर साइंस का परिणाम
17% पीछे लुढ़क गया है जिससे शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों में काफी निराशा
है. परिणाम के पश्चात शिक्षकों ने कहा कि साइंस में प्रत्येक साल विद्यार्थी कम ही सफल होते
हैं. लेकिन पश्चिमी सिंहभूम में पिछले साल का रिकॉर्ड तो दूर की बात है, पिछले साल का परिणाम के आसपास भी नहीं आना चिंता का विषय
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: मंगला बाजार में आज भी की जाती है धान की अदला-बदली सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल : डॉ मुरारी
सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो गई
है. सरकार इस पर गंभीर नहीं
है. जिसके कारण इस बार इंटरमीडिएट साइंस का परिणाम सही नहीं हुआ
है. ये बातें
जीसी जैन कॉमर्स कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. मुरारी
बैध ने
कही. उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों में कुछ हद तक तो पढ़ाई होती
है. लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होने के कारण विद्यार्थी सफल नहीं हो पाते
हैं. बच्चों को नियमित रूप से गाइड नहीं मिलता
है. पश्चिमी सिंहभूम में पहली बार साइंस का परिणाम खराब नहीं हुआ है, इससे पहले भी खराब हो चुका
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