योजना का काम अधूरा छोड़ा, फिर भी कर दिया भुगतान
अब 30 से 35 रुपये तक की ही होती है बिक्री
उन्होंने बताया कि पहले हर मंगलवार को मंगला बाजार में दो सौ से ढाई सौ तक ढिबरी और झरना बिकते थे पर अब उतनी बिक्री नहीं होती है. अब 30 से 35 रुपये तक की बिक्री से पूरे सप्ताह का कार्य चलता है. इसी में परिवार को चलाना भी पड़ता है और इसे बनाने के लिए सामान की भी खरीदारी करनी पड़ती है. उन्होंने बताया कि यह बहुत ही पेचीदा काम है. देखने में तो छोटा है पर बहुत ही पेचीदा काम है. इस कारण घर का कोई अन्य सदस्य इस कार्य को करने में रुचि नहीं लेता, और यही स्थिति रही तो आने वाले समय में इसका निर्माण कार्य देखते-देखते बंद हो जाएगा. यह घर की शोभा की वस्तु बनकर रह जाएगी. इसे भी पढ़ें :Breaking">https://lagatar.in/breaking-100-crore-mid-day-meal-scam-sanjay-tiwari-surrendered-after-ed-and-police-raid/">Breaking: 100 करोड़ मिड डे मील घोटाला, ED और पुलिस की दबिश के बाद संजय तिवारी ने किया सरेंडर [wpse_comments_template]

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