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चाईबासा : झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक के साथ अस्पताल के अधिकारी ने किया दुर्व्यवहार

[caption id="attachment_548873" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/Chaibasa-Social.jpg"

alt="" width="600" height="696" /> अस्पताल के अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता.[/caption] Chaibasa (Sukesh Kumar) : नोवामुंडी प्रखंड के बड़ाजामदा स्थिति केंद्रीय अस्पताल की समस्याओं को उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमृत माझी के साथ दुर्व्यवहार का मामला प्रकाश में आया है. यह मामला मंगलवार का है. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक अमृत माझी जब उक्त अस्पताल पहुंचकर वहां की कमियों को उजागर कर सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे. इसी बीच अस्पताल के अधिकारी उदय शंकर पहुंचकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया उनकी बाइक छीन ली. अब यह मामला तूल पकड़ने लगा है. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-onion-laden-truck-overturned-driver-and-helper-injured/">बहरागोड़ा

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चाईबासा में बैठक कर बनाई रणनीति

बुधवार को झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने चाईबासा में एक बैठक कर रणनीति बनाई है. साथ ही दुर्व्यवहार करने वाले पदाधिकारी डब्ल्यूए ऑफिसर उदय शंकर को हटाने की मांग पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है. अभियान के संयोजक अमृत माझी ने कहा कि अस्पताल के बाहर से ही वीडियो बनाकर वहां के कमियों को दिखा रहा था. तभी ऑफिसर ने सामने आकर कहा कि यहां का वीडियो बनाना मना है. यह मेरा क्षेत्र है. इस क्षेत्र से बाहर जाओ. इसके अलावा अन्य कई तरह का दुव्यवहार भी किया. मेरा मोबाइल भी उन्होंने छीन लिया. लगभग एक घंटे बाद मोबाइल वापस दिया. संस्था ने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि इस तरह के पदाधिकारी को अविलंब हटाया जाए. अन्यथा आंदोलन करने को बाध्य होंगे. इसे भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-the-mood-of-the-weather-started-changing-feeling-of-heat/">धनबाद:

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मजदूरों के उपचार के उद्देश्य से बना है यह अस्पताल 

बड़ाजामदा का केंद्रीय अस्पताल मूल रूप से नोवामुंडी अंचल के खदानों में काम करने वाले मजदूरों के उपचार के लिए बनाया गया है. जो अविभाजित बिहार के समय अस्पताल की अलग समृद्धि रही है. इकाई के अनुरूप डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी पदस्थापित थे. मजदूरों का समुचित इलाज होता था. अस्पताल परिसर तब पार्कनुमा था. जिसमें इलाजरत मजदूर सुबह, शाम भ्रमण करते थे. जैसे ही झारखंड राज्य अस्तित्व में आया धीरे-धीरे यह अस्पताल अपनी ख्याति खोने लगी और अब इस परिसर को जीवित रखने के लिए बमुश्किल डॉक्टर और नर्स, कर्मचारी यहां कार्यरत है. [wpse_comments_template]

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