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: साउथ बिहार एक्सप्रेस का बामड़ा व बागडीह में दिया गया स्टोपेज सत्र का मुख्य उद्देश्य छात्र- छात्राओं को उक्त अधिनियम के मुख्य प्रावधानों से अवगत कराना एवं विद्यालय के स्तर पर बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण को सुनिश्चित करना था. सत्र के दौरान अधिनियम के तहत यौन अपराधों की विस्तृत परिभाषा के बारे में बताया गया. विद्यालय के हेल्थ एवं वेलनेस कार्यक्रम की शिक्षिका अलका किरण, मीनाक्षी सहाय एवं सेंटर फॉर काटेलाइजिंग चेंज की प्रतिनिधि काजल कुमारी ने बच्चों को बताया कि बाल यौन शोषण सिर्फ बलात्कार ही नहीं अपितु बच्चों के किसी भी अंग को गलत तरीके से छूना, निजी अंगों पर टिप्पणी करना, गलत तस्वीर दिखाना तथा अन्य वैसे सभी प्रकार के शारीरिक संपर्क जिससे बच्चे असहज महसूस करें, बाल यौन शोषण की श्रेणी में आते हैं. बताया गया कि ऐसी घटनाओं की शिकायत करने में वे संकोच नहीं करें. इसे भी पढ़ें : कलश">https://lagatar.in/sri-sri-shiva-pran-pratishtha-mahayagya-begins-in-chechkappi-with-kalash-yatra/">कलश
यात्रा के साथ चेचकप्पी में श्री श्री शिव प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ शुरू मालूम हो कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत बच्चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं और इनमें से लगभग दो तिहाई बच्चे भय और संकोच के कारण अपने साथ हुए यौन शोषण की शिकायत नहीं करते हैं. सत्र के उपरांत छात्र-छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे बाल यौन शोषण से संबंधित घटनाओं की शिकायत बिना किसी भय एवं घबराहट के साथ करेंगे. उक्त जागरुकता सत्र में विद्यालय के वर्ग 6 से वर्ग 8 के लगभग 128 छात्र-छात्राएं शामिल थे. [wpse_comments_template]

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