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चाईबासा : महिला आरक्षण बिल में सभी वर्गों की महिलाओं को आरक्षण मिले तो बेहतर - डॉ दानगी

Chaibasa (Sukesh Kumar) : एक समाज, एक राष्ट्र सही मायने में तभी उन्नत एवं सभ्य होगा जब पुरूष और महिला की समान भागीदारी होगी. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: अर्थात् जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता बसते हैं. इस तरह की शास्त्र सम्मत बातें कहना और समाज में उसके उलट घटनाएं घटना एक चिंतनीय विषय रहा है. इसलिए लोकसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का बिल लाना, वो भी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से आना स्वागत योग्य है. यह बातें कोल्हान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ दानगी सोरेन ने कही. उन्होंने कहा कि बशर्तें इसका उद्देश्य भी नारी हित में हो तो बड़ी खुशी होगी. मुझे उम्मीद है इस बिल से नीति नियमों के निर्धारण में महिलाओं की भूमिका सुनिश्चित होगी. इसे भी पढ़ें : रांची:">https://lagatar.in/ranchi-assistant-excise-commissioner-suspended-for-selling-spurious-liquor-in-shop/">रांची:

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महिला आरक्षण में सभी समुदाय के महिलाओं को बात रखने का मिले मौका

महिला प्रतिनिधियों की संख्या 33% होने पर सशक्त रूप से महिलाओं की समस्या के उपर चर्चा परिचर्चा हो सकेगी और सरकार भी निदानात्मक उपाय खोजने में समर्थ हो सकेगी. चुंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहां अनेक समुदाय, अनेक जातियां, अनेक भाषाएं एवं अनेक संस्कृतियां एक साथ निवास करती है. संस्कृति अलग होने से उनकी समस्याओं में भी विभिन्नताएं हैं. इस 33% महिला आरक्षण में सभी समुदायों के महिलाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिले ताकि एक सकारात्मक परिणाम हमारे देश को प्राप्त हो सके. इस बिल के पास होने से महिलाएं स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकेंगी. [wpse_comments_template]

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