Chaibasa (Sukesh Kumar) : कोल्हान विश्वविद्यालय झारखंड का पहला विश्वविद्यालय है जहां पर एक भी प्राध्यापक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. सहायक प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर पद पर ही शिक्षक कार्यरत हैं. प्रोफेसर विहिन कोल्हान विश्वविद्यालय बन गया है. कोल्हान विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग में अभी कोई प्रोफेसर नहीं हैं. कारण अरसे से पदोन्नति नहीं हुई है. ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय के पीजी डिपार्टमेंट्स असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफसरों के भरोसे चल रहे हैं. पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं होने से बहुत ऐसे प्राध्यापक हैं जो सहायक प्राध्यापक के पद से ही अवकाश ग्रहण कर रहे हैं. उनके पास पदोन्नति होने की सारी योग्यताएं हैं. लेकिन वह सब धरी की धरी रह जा रही हैं. इसे भी पढ़ें : बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-kurmidih-hanumanadhi-temple-durga-puja-committee-formed/">बोकारो
: कुर्मीडीह हनुमानढ़ी मंदिर दुर्गा पूजा कमेटी गठित अब यह पदोन्नति के नियम जिसे 2008 बैच के प्राध्यापकों के लिए केस-2010 तथा 2018 और उसके बाद योगदान देने वाले प्राध्यापकों के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2018 के तहत पदोन्नति देनी है. लेकिन यह नियम अभी किसी भी तरह के कार्य रूप को अंजाम देने में विफल रही है. झारखंड के कैबिनेट से 2022 से प्रभावी यह नियमावली अभी अपने क़दमताल में भी नहीं आ सकी है. इस कारण विश्वविद्यालय में शोध, शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में काफी अड़चनें आ रही हैं. विश्वविद्यालय से एनइटी/जेआरएफ किये हुए विद्यार्थी शोध निदेशक के रूप में प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर जैसे प्राध्यापक न मिल पाने के कारण अन्य विश्वविद्यालयों में शोध कार्य के लिए जाने को मजबूर हो रहे हैं. कोल्हान विश्वविद्यालय के अंगीभूत घाटशिला कॉलेज से जेआरएफ करने व अभी रांची विश्वविद्यालय में शोध कार्य में लगे एक छात्र राकेश कुमार गोप ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर जैसे कोई उच्च मानक के शोध निदेशक नहीं होने के कारण मैं राँची विश्वविद्यालय में शोध कार्य हेतु पंजीकरण करवाया. इसे भी पढ़ें : गुमला">https://lagatar.in/gumla-state-government-is-the-protector-of-corrupt-people-and-robbers-babulal/">गुमला
में बोले बाबूलाल, राज्य सरकार भ्रष्टाचारियों और लुटेरों की है संरक्षक ऐसी ही एक जेआरएफ छात्रा जो घाटशिला कॉलेज की ही है. छात्रा जॉली साहू ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में कोई शोध निदेशक नहीं मिल पाने के कारण अभी पंजीकरण ही नहीं करवाई है. उसका कहना है कि शोध कार्य करूंगी पर उनके निर्देशन में अभी शोध के लिए कोई जगह ही रिक्त नहीं है. दरअसल, सारा मामला पदोन्नति के कारण ही फंस कर लटका हुआ है. यदि 2008 बैच के सहायक प्राध्यापकों को यदि पदोन्नति दे दी जाए तो उनके निर्देशन में शोध कार्य करने के जगह भी बढ़ेंगे और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता भी बढ़ेगी. लेकिन यह मामला फंसकर रह गया है. इसे भी पढ़ें : बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-kurmidih-hanumanadhi-temple-durga-puja-committee-formed/">बोकारो
: कुर्मीडीह हनुमानढ़ी मंदिर दुर्गा पूजा कमेटी गठित
: 24 सितंबर से शुरू होगा पौधरोपण अभियान : पुरेंद्र
: कुर्मीडीह हनुमानढ़ी मंदिर दुर्गा पूजा कमेटी गठित अब यह पदोन्नति के नियम जिसे 2008 बैच के प्राध्यापकों के लिए केस-2010 तथा 2018 और उसके बाद योगदान देने वाले प्राध्यापकों के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2018 के तहत पदोन्नति देनी है. लेकिन यह नियम अभी किसी भी तरह के कार्य रूप को अंजाम देने में विफल रही है. झारखंड के कैबिनेट से 2022 से प्रभावी यह नियमावली अभी अपने क़दमताल में भी नहीं आ सकी है. इस कारण विश्वविद्यालय में शोध, शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में काफी अड़चनें आ रही हैं. विश्वविद्यालय से एनइटी/जेआरएफ किये हुए विद्यार्थी शोध निदेशक के रूप में प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर जैसे प्राध्यापक न मिल पाने के कारण अन्य विश्वविद्यालयों में शोध कार्य के लिए जाने को मजबूर हो रहे हैं. कोल्हान विश्वविद्यालय के अंगीभूत घाटशिला कॉलेज से जेआरएफ करने व अभी रांची विश्वविद्यालय में शोध कार्य में लगे एक छात्र राकेश कुमार गोप ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर जैसे कोई उच्च मानक के शोध निदेशक नहीं होने के कारण मैं राँची विश्वविद्यालय में शोध कार्य हेतु पंजीकरण करवाया. इसे भी पढ़ें : गुमला">https://lagatar.in/gumla-state-government-is-the-protector-of-corrupt-people-and-robbers-babulal/">गुमला
में बोले बाबूलाल, राज्य सरकार भ्रष्टाचारियों और लुटेरों की है संरक्षक ऐसी ही एक जेआरएफ छात्रा जो घाटशिला कॉलेज की ही है. छात्रा जॉली साहू ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में कोई शोध निदेशक नहीं मिल पाने के कारण अभी पंजीकरण ही नहीं करवाई है. उसका कहना है कि शोध कार्य करूंगी पर उनके निर्देशन में अभी शोध के लिए कोई जगह ही रिक्त नहीं है. दरअसल, सारा मामला पदोन्नति के कारण ही फंस कर लटका हुआ है. यदि 2008 बैच के सहायक प्राध्यापकों को यदि पदोन्नति दे दी जाए तो उनके निर्देशन में शोध कार्य करने के जगह भी बढ़ेंगे और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता भी बढ़ेगी. लेकिन यह मामला फंसकर रह गया है. इसे भी पढ़ें : बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-kurmidih-hanumanadhi-temple-durga-puja-committee-formed/">बोकारो
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प्राध्यापक की पदोन्नति का मामला कोल्हान विवि में लंबित : डॉ राजेंद्र
कोल्हान विश्वविद्यालय के टाकू अध्यक्ष डॉ राजेंद्र भारती ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में प्राध्यापक की पदोन्नति की लंबे समय से नहीं हुई है. जिसके कारण अभी तक कई शिक्षक सहायक पद पर ही कार्यरत है. एक भी प्रोफेसर नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-plantation-campaign-will-start-from-september-24-purendra/">आदित्यपुर: 24 सितंबर से शुरू होगा पौधरोपण अभियान : पुरेंद्र
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