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वोट बैंक की लोभ लालच की राजनीतिक स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल दोषी हैं - सालखन
आदिवासी समाज के समक्ष तात्कालिक दो-तीन बड़ी चुनौतियां खड़ी है. सरना धर्म (प्रकृति धर्म) कोड की मान्यता का मामला. भारत के संविधान (अनुच्छेद 25) के तहत भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समझदारी और सहयोग से यह 2023 में प्राप्त हो सकता है. कुड़मी को एसटी बना दिया गया है. इस मामले पर आदिवासी समाज में चिंता जायज है. लेकिन जाति विशेष के खिलाफ संघर्ष करने की रणनीति गलत है. कुड़मी जाति एसटी बनने की जिद कर रहा है तो कल तेली, बनिया, कुम्हार आदि भी कर सकता है. तब आदिवासी किसके-किसके खिलाफ लड़ेगा. विचारणीय विषय यह है कि यह वोट बैंक से जुड़ा राजनीतिक मामला है. इसके पीछे वोट बैंक की लोभ लालच की राजनीतिक स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल दोषी हैं. अभी कुड़मी को एसटी बनाने की अनुशंसा झारखंड की जेएमएम सरकार, ओडिशा की बीजेडी सरकार और बंगाल की टीएमसी सरकार ने कर दिया है. कुड़मी के समर्थन में प्रमुख राजनीतिक दल और उसके प्रतिनिधि खुलकर समर्थन और हस्ताक्षर कर रहे हैं. जबकि आदिवासी जनप्रतिनिधि पार्लियामेंट असेंबली और पंचायत तक में अधिकांश चुप हैं. इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-pick-up-van-loaded-with-fish-overturned-on-the-middle-of-the-road-uncontrollably/">चांडिल: अनियंत्रित होकर बीच सड़क पर पलटा मछली लदा पिकअप वैन [wpse_comments_template]

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