Chaibasa (Sukesh Kumar) : जिला मुखिया संघ ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व सांसद गीता कोड़ा से मुलाकात कर
जिला में मनरेगा में हो रही समस्याओं को साझा
किया. संघ की ओर से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह को संबोधित संलग्न मांग पत्र भी केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व सांसद गीता कोड़ा को सौंपा
गया. अनुरोध किया गया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री तक उनकी मांगों को पहुंचाया
जाए. मुखिया संघ के प्रतिनिधियों ने कहा पश्चिमी सिंहभूम जैसे सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े जिले के लिए मनरेगा जीवनरेखा समान
है. यह ग्रामीण
मजदूरों के लिए
रोजगार का एक बड़ा साधन भी
है. पिछले 16 सालों में मनरेगा से कई निर्माण कार्य भी हुए
है. लेकिन अब कई समस्याओं के कारण कार्यक्रम के कार्यान्वयन में जन प्रतिनिधियों को काफी परेशानी हो रही
है. जिसके कारण
मजदूरों को पर्याप्त
रोजगार नहीं मिल पा रहा
है. समय पर
एफटीओ के अनुमोदन के
बावजूद मजदूरों को
ससमय मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा
है. इस भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-nataraj-hotel-seal-operated-under-tourism-department/">बहरागोड़ा
: पर्यटन विभाग के तहत संचालित नटराज होटल सील विभिन्न समस्याओं के कारण नहीं बन पाती हाजरी
बताया गया कि राष्ट्रीय मोबाइल
मोनिटरिंग प्रणाली
(एनएमएमसी) के कारण मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने में बहुत समस्या हो रही
है. विभिन्न
तकनिकी समस्याओं व इंटरनेट नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण कई बार न
हाजरी चढ़ पाती है और न
फोटो. कई बार तो मोबाइल
एप खुलता तक नहीं
है. मजदूरों द्वारा छह दिन तक पूरा काम करने के बावजूद कई बार इस
एप में पूरी
हाजरी नहीं
चढ़ पाती
है. इसके कारण अनेक
मजदूर अपनी
मजदूरी से वंचित हो जाते हैं.
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: बार एसोसिएशन ने विधायक को किया सम्मानित एबीपीसी से मजदूरों को हो रहा नुकसान
आधार-आधारित भुगतान प्रणाली
(एबीपीसी) की अनिवार्यता के कारण भी अनेक
मजदूरों को काम करने के बाद
मजदूरी नहीं मिल रही
है. अगर मस्टर रोल में कुल
मजदूरों में केवल एक का भी
एबीपीसी लिंक नहीं है, तो सभी
मजदूरों का भुगतान रोक दिया जा रहा
है. अनेक
मजदूरों का बैंक खाते, आधार और जॉब कार्ड में नाम के
स्पेल्लिंग में फर्क होने के कारण उनका
एबीपीसी लिंक होने में समस्या होती
है. संघ ने यह भी कहा है कि पिछले कई वर्षों से यह भी देखा जा रहा है कि साल के पहले पांच-छह महीने
खत्म होने के बाद केंद्र से
फंड कई बार रुक जाता
है, जिसके कारण काम भी ठप पड़ जाता
है. हालांकि मनरेगा कानून अनुसार तो
मुख्यतः ग्राम पंचायतों को ही कार्यक्रम का कार्यान्वयन करना है, लेकिन अब फंड एवं कार्यान्वयन
सम्बंधित अधिकांश निर्णय व प्रक्रिया पंचायतों के हाथों में नहीं
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