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चाईबासा: सुरक्षा बलों की दबिश व आत्‍मसमर्पण नीति से संगठन छोड़ भाग रहे नक्‍सली

SHAILESH SINGH Kiriburu:  पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत नक्सलियों का सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सारंडा,  कोल्हान एवं पोड़ाहाट के जंगलों के आधार क्षेत्र में प्रभाव घटने से नक्‍सली संगठनों के नेताओं की बौखलाहट बढ़ गई है. एक तरफ जहां कई बड़े नक्‍सली प्रशासन के समक्ष आत्‍मसमर्पण कर चुके हैं वहीं दर्जनों स्‍थानीय व बाहरी नक्‍सली संगठन छोड़कर अन्‍यत्र भाग चुके हैं. इसके पीछे की वजह पुलिस, सीआरपीएफ एवं कोबरा फोर्स की निरंतर कार्रवाई व सरकार की आकर्षक आत्‍मसमर्पण नीति बताई जा रही है. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-jharkhand-government-itself-insecure-what-will-it-protect-people-kapil-mishra/">जमशेदपुर:

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नक्सलियों को समझ में नहीं आ रहा भाग रहे कैडर को कैसे रोकें

[caption id="attachment_291880" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/naxlia..jpg"

alt="" width="600" height="277" /> कुख्यात नक्सली जीवन कन्डुलना आत्मसमर्पण करने के बाद चेक लेते हुए. (फाइल फोटो).[/caption] सुरक्षा बलों की निरंतर जारी छापामारी के कारण इस दौरान एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा, पत्नी शिला दीदी समेत दर्जनों पकड़े गए वहीं मुठभेड़ में दर्जनों बडे़ नक्सली भी मारे गए. जीवन कन्डुलना, महाराज प्रमाणिक, सुरेश मुंडा जैसे दर्जनों बडे़ नक्सली संगठन छोड़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठा  खुला कैंप जेल में आराम की जीवन बिता रहे हैं. वहीं पिछले कुछ महीनों के अंदर नक्सली दस्ता से दर्जनों स्थानीय व बाहरी नक्सलियों के भाग निकलने के बाद नक्सलियों को समझ में नहीं आ रहा है कि भाग रहे कैडर को कैसे रोकें, तथा निरंतर घट रहे प्रभाव वाले क्षेत्र में ग्रामीणों का समर्थन कैसे प्राप्त करें.

9 जनवरी को तुम्बाहाका जंगल में मुठभेड़ के बाद से बदले हालात

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बीते 9 जनवरी को टोंटो थाना अन्तर्गत कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र के तुम्बाहाका जंगल में तत्कालीन एसपी एवं कोल्हान के वर्तमान डीआईजी अजय लिंडा के नेतृत्व में पुलिस व सीआरपीएफ की टीम के साथ एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते से भीषण मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ के बाद मिसिर बेसरा समेत अन्य नक्सली अपनी वर्दी खोल सादे लिबास में सुरक्षित जंगल में भाग गए थे. जंगल में छुपे इन नक्सलियों को रात के समय टोंटो थाना के रेंगड़ाहातु गांव निवासी नक्सली डांगुर सुंडी ने खाना पहुंचाया था. हालांकि नक्सली डांगुर सुंडी को टोंटो थाना पुलिस बीते एक अप्रैल को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. गिरफ्तारी के बाद डांगुर सुंडी ने पुलिस के सामने स्वीकार किया था कि वह सागेन अंगारिया दस्ते का सदस्य था तथा बीते 9 जनवरी को तुम्बाहाका जंगल में नक्सलियों के साथ पुलिस की हुई मुठभेड़ के बाद जंगल में सादे लिबास में ग्रामीणों के वेष में छुपे मिसिर बेसरा के दस्ता के सदस्यों के लिये खाना पहुंचाया था.

अजय लिंडा की अपील का रेंगड़ाहातु व आसपास के ग्रामीणों के बीच व्‍यापक असर, दर्जनों नक्‍सली दस्‍ता छोड़कर फरार

इस मुठभेड़ के बाद अजय लिंडा ने रेंगड़ाहातु व आसपास के गांव के ग्रामीणों के बीच जनसम्पर्क अभियान चलाकर ग्रामीणों से अपील की थी कि जो युवक दस्ता में शामिल हैं वह या तो दस्ता छोड़ अन्यत्र भाग जाएं  या आत्मसमर्पण कर दें. ताकि उसे आत्मसमर्पण नीति का लाभ दिया जा सके. इस अपील का व्यापक असर हुआ. विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि अपील के बाद मार्च महीने में नक्सली दस्ता से छुट्टी लेकर मागे पर्व मनाने रेंगड़ाहातु गांव आए जोगेन कोड़ा, जोगेन का एक बेटा,  बोयो हंसदा,  प्रधान हेम्ब्रम समेत 5-6 नक्सली दस्ता छोड़ अन्यत्र भाग खड़े हुए हैं. इसके अलावे कटम्बा गांव निवासी मोने तियू,  आजदबेडा़ गांव निवासी विश्वनाथ हंसदा,  गिरीडीह जिला निवासी बब्लू हंसदा,  सांगाजाटा समेत विभिन्न गांवों के दर्जनों नक्सली पिछले कुछ दिनों के दौरान दस्ता छोड़ फरार हो चुके हैं. इससे नक्सली काफी कमजोर हुए हैं.  जिससे पुलिस व ग्रामीणों के खिलाफ उनमें भारी बौखलाहट है.

युवकों को नक्सल में भविष्य नहीं नजर आ रहा, जान जाने का खतरा अलग से

पुलिस की निरंतर ऑपरेशन व नक्सली दस्ता में स्थानीय नक्सलियों का तथाकथित शोषण से अनेक स्थानीय छोटे-बडे़ नक्सली परेशान हैं. नक्सल में उन्हें अपना भविष्य नहीं नजर आ रहा है तथा जान जाने का हमेशा खतरा बना रह रहा है. यही वजह है कि वह दस्ता छोड़ भाग रहे हैं. सूत्रों ने बताया की कुछ माह पूर्व नक्सली समस्या से त्रस्त होकर रेंगड़ाहातु गांव के ग्रामीणों ने बैठक कर अपनी सुरक्षा की दृष्टिकोण से गांव के मिशन स्कूल के बगल में पुलिस कैंप स्थापित करवाने पर विचार किया था. लेकिन इस बैठक में मौजूद नक्सली समर्थक डांगुर सुंडी ने इस बात की जानकारी नक्सलियों तक पहुंचा दी.  जिसके बाद नक्सलियों ने गांव में आकर ग्रामीणों को धमकाया और गांव से कुछ युवकों को अपने साथ लेते गए. बताया जाता बाद में नक्सलियों के साथ गए युवक भी भाग खड़े हुए. हालात ऐसे हैं कि नक्सली दस्ता से कब और कौन नक्सली भाग जाए कहा नहीं जा सकता है.

पिछले कुछ वर्षों के दौरान संगठन का पैसा लेकर भागे या आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की सूची

[caption id="attachment_291883" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/naxlib.jpg"

alt="" width="600" height="281" /> कुख्यात नक्सली सुरेश मुंडा व लोदरो लोहरा सरेंडर के बाद तत्कालीन एसपी अजय लिंडा व उपायुक्त के साथ. (फाइल फोटो)[/caption] -प्रशांत उर्फ लंबू जो संगठन का 75 लाख रुपये व तीन महिला साथियों के साथ आपरेशन एनाकोंडा के दौरान सारंडा से भागा था. जिसे राउरकेला पुलिस ने एक यात्री बस से पैसों के साथ पकडा़. -रिजनल कमिटी सदस्य कुंदन पाहन पैसा,  हथियार व अन्य साथियों के साथ भागा. बाद में उसने पुलिस के समक्ष  आत्मसमर्पण किया. -15 लाख का इनामी नक्सली जीवन कंडुलना अपनी पत्नी के साथ भागा एवं आत्मसमर्पण किया. -10 लाख रुपये का इनामी महाराज प्रमाणिक,  10 लाख का इनामी सुरेश मुंडा,  लोदरो लोहरा उर्फ सुभाष  और बैलून सरदार ने भी आत्मसमर्पण किया. -चार लाख रुपये का इनामी माओवादी सह एसीएम कैडर मंगल सिंह मुंडा उर्फ अलिंदर  (ग्राम- बगोई, थाना- तमाड़, जिला रांची) ने अपने एक इनामी नक्सली साथी के साथ ओडि़सा पुलिस के सामने एसएलआर हथियार के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था. मंगल सिंह मुंडा अनमोल दा उर्फ समर जी के नेतृत्व वाली एसडीएस जोनल कमिटी का मारक दस्ता के सक्रिय सदस्य के साथ-साथ एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का अंगरक्षक था. -महिला नक्सली पालो होनहागा उर्फ भारती (सारंडा के बालिबा निवासी) व उसकी बेटी  सनीका टोपनो उर्फ संगेल मुण्डा उर्फ सुशील  (ग्राम-लंगलकाटा, थाना-केवलंग) एवं उसकी पत्नी सुशारी उर्फ सुनीता हंसदा उर्फ मरीयम (ग्राम-हतनाबुरू, थाना-छोटानागरा), सुनीता मुण्डरी (ग्राम-गोताड़, थाना-गारू, लातेहार), संजय मुण्डा उर्फ सोमरा (ग्राम सरसोया, सनबालिजोर,थाना-केवलंग), जेम्स पुर्ती उर्फ संजय (ग्राम- जोरबेडा़, थाना-अड़की, खूंटी), निलू बंकिरा उर्फ नागी (ग्राम-तिरिलपोसी, थाना-जराईकेला), सुशांति उर्फ मुली मुण्डा (ग्राम-नुआगांव, थाना-जराईकेला), राजेश जी (ग्राम-तोपाडीह, थाना-केवलंग), शांति कन्डुलना (सारंडा के कुदलिबाद निवासी) एवं उसका पति आदि दर्जनों कुख्यात नक्सली पिछले कुछ वर्षों के दौरान संगठन से नाता तोड़ मुख्यधारा में लौट चुके हैं. इसे भी पढ़ें: चाईबासा:">https://lagatar.in/chaibasa-case-of-fraud-registered-against-awas-mitra-in-kathbhari-panchayat/">चाईबासा:

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