Amit Kumar
Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिला के नोवामुंडी प्रखंड से लगभग 12 किमी दूर बड़ाजामदा क्षेत्र के बोकना गांव के लोग आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं. गांव में छह टोला हैं, जहां 400 से अधिक लोग निवास करते हैं. इसके बावजूद गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क नहीं है. मुख्य सड़क तक जाने के लिए ग्रामीणों को नदी पार करनी पड़ती है.
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बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने से यह रास्ता और अधिक खतरनाक हो जाता है. ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के मौसम में नदी पार करना सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है. बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी जरूरी काम के लिए नदी पार कर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है. गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने पर समस्या और गंभीर हो जाती है.
समय पर वाहन नहीं मिलने के कारण मरीज को नदी पार कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. कुछ दिन पहले गांव के एक बुजुर्ग की तबीयत अचानक बिगड़ गई. परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक सड़क संपर्क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद गांव के मुंडा विक्रम मुंडा की गाड़ी से बुजुर्ग को इलाज के लिए चाईबासा सरकारी अस्पताल ले जाया गया.
इससे पहले बुजुर्ग को खटिया के सहारे नदी पार कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया. इस दौरान ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गांव का संपर्क बरसात के दिनों में लगभग कट जाता है. रोजमर्रा के काम के लिए भी ग्रामीणों को जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है. स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और ग्रामीणों को बाजार आने-जाने में परेशानी होती है. आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है.
सड़क नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी
सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक गांव में सड़क नहीं पहुंचाई जाती, तब तक वे चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे. वहीं इसे लेकर ग्रामीणों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है और ग्रामीण चरणबद्ध आंदोलन के लिए तैयार है.
ग्रामीणों की मांग है कि बोकना गांव के सभी छह टोला को मुख्य सड़क से जोड़ा जाए. सड़क बनने से नदी पार करने की मजबूरी खत्म होगी और ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार तथा परिवहन की सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी.
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