Search

 
 
 

Chaibasa News : सारंडा में नक्सलियों का काउंटडाउन शुरू, ‘नेत्रा Q5’ ड्रोन से छिपे नक्सलियों की पहचान

Ranchi/Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहा सुरक्षा बलों का अभियान अब अंतिम मोड़ पर है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नक्सलियों के लिए अब रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं. करीब 20 से 25 नक्सलियों का दस्ता इस इलाके में सक्रिय होने की सूचना है. उनके आने-जाने के रास्तों पर भी निगरानी कड़ी कर दी गई है.
 
सुरक्षा बलों के जवान अब अभियान से पहले नेत्रा Q5 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

Ranchi/Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहा सुरक्षा बलों का अभियान अब अंतिम मोड़ पर है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नक्सलियों के लिए अब रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं. करीब 20 से 25 नक्सलियों का दस्ता इस इलाके में सक्रिय होने की सूचना है. उनके आने-जाने के रास्तों पर भी निगरानी कड़ी कर दी गई है.

 

सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ आधुनिक एआई तकनीक से लैस ‘नेत्रा Q5’ ड्रोन के जरिए नक्सलियों की हर गतिविधि पर नजर रख रही है. ड्रोन के माध्यम से नक्सलियों की मूवमेंट, उनकी संख्या और उनके पास मौजूद हथियारों की जानकारी जुटाई जा रही है. इससे ऑपरेशन को सटीक दिशा मिल रही है.

 

Uploaded Image

नक्सलियों के ठिकानों पर दूर से ही नजर रख रहे हैं सुरक्षा बलों के जवान.

 

बताया जा रहा है कि जिन इलाकों में नक्सली छिपे हुए हैं, वहां लैंडमाइंस भी बिछाए गए हैं. यही वजह है कि सुरक्षाबलों को आगे बढ़ने में सतर्कता बरतनी पड़ रही है. हालांकि बम निरोधक टीमों की मदद से कई स्थानों पर लैंड माइंस को निष्क्रिय कर दिया गया है और सुरक्षाबल धीरे-धीरे नक्सलियों के करीब पहुंच रहे हैं.

 

सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ इनामी नक्सली पुलिस के संपर्क में हैं. जो अंदरूनी जानकारी देकर अभियान को मजबूत बना रहे हैं. इससे सुरक्षाबलों को रणनीतिक बढ़त मिल रही है.

 

इस पूरे ऑपरेशन में हाईटेक ड्रोन की भूमिका अहम मानी जा रही है. सुरक्षा बल पहले ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की सर्चिंग कर रहे हैं. संदिग्ध स्थानों की हाई क्वालिटी तस्वीरें और थर्मल इमेज तैयार की जा रही हैं. जिससे छिपे हुए नक्सलियों की सटीक लोकेशन का पता चल रहा है.

 

ड्रोन से मिलने वाली जानकारी रियल टाइम में कंट्रोल रूम तक पहुंचती है. जिसके आधार पर सुरक्षाबल तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं. इससे ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ी है और जवानों का जोखिम कम हुआ है.

 

करीब 5 किलोमीटर से अधिक रेंज और लगभग 5 घंटे तक उड़ान क्षमता वाला यह ड्रोन घने जंगलों में भी छोटी से छोटी हलचल को पकड़ने में सक्षम है. थर्मल इमेजिंग तकनीक के कारण रात के अंधेरे में भी गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है.

 

बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर अब झारखंड में भी इस तरह की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. हाल के दिनों में हजारीबाग, पलामू और लातेहार में मिली सफलताओं में भी तकनीक की अहम भूमिका रही है.

 

सूत्र का मानना है कि यदि इसी तरह अभियान जारी रहा, तो जल्द ही सारंडा जंगल से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है. फिलहाल सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति और आधुनिक तकनीक ने नक्सलियों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं बच गया है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही