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पहली वैसाख को ही अमृतपान करा पांच खालसा सजाए गए थे
[caption id="attachment_289824" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="270" /> गुरुद्वारा में उपस्थित संगत[/caption] उन्होंने कहा कि दशम गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह द्वारा पहली वैसाख को ही अमृतपान कराकर पांच खालसा सजाए गए थे. पांच कक्के यानी केश, कंघा, कड़ा, कच्छा तथा कृपाण धारण कराकर सिखी स्वरूप दिया गया. गुरु गोविंद सिंह की ही देन है कि सारे विश्व में सिख नजर आते हैं. जमशेदपुर से आए जसपाल छाबड़ा ने अपनी मधुर आवाज के साथ अपने कीर्तन से संगत को निहाल किया. कीर्तन में तबले पर उनका साथ दे रहे थे उनके साथी जसपाल सिंह ने “सुरां सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत, पुरजा पुरजा कट मरे कबहूं न छाड़े खेत...” कीर्तन पेश किया. कीर्तन के उपरांत विश्व शांति के लिये अरदास की गई.
प्रसाद व गुरु का लंगर बरताया गया
[caption id="attachment_289817" align="aligncenter" width="264"]alt="" width="264" height="300" /> गुरु के लंगर में प्रसाद ग्रहण करती संगत.[/caption] इसके बाद प्रसाद एवं गुरु का लंगर बरताया गया. लंगर की देखरेख तथा बरताने की सेवा में युवा खालसा के रौनक सिंह खोखर, गगनदीप सिंह वालिया, इंदरजीत सिंह रंधावा, दीपक सिंह, दलविन्दर सिंह, कुलदीप सिंह, दलबीर सिंह, तेजपाल सिंह, जसप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह एवं गोल्डी ने सराहनीय कार्य किया. गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष, सचिव तथा कोषाध्यक्ष द्वारा सभी को वैसाखी की बधाई दी गई. इसे भी पढ़ें: आलिया-">https://lagatar.in/alia-ranbirs-unique-wedding-took-seven-rounds-in-the-balcony/">आलिया-
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