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चाईबासा : उरांव समुदाय का महान पर्व करमा जागरण के साथ शुरू

Chaibasa (Sukesh Kumar) : चाईबासा के सातों अखाड़ा सहित आसपास के गावों में सोमवार से नयाखान किया गया. समुदाय के सभी लोग अपने-अपने घरों में नये अन्न को अपने पूर्वजों व अपने इष्ट देवता धर्मेश को चढ़ावा कर पूजा अर्चना की गई. उसके पश्चात प्रसाद के रूप में नये अन्न का ग्रहण किया गया. करमा त्योहार धूमधाम और हर्षोल्लास तथा पुरी श्रद्धा के साथ मनाया गया. अखाड़ा में नवयुवक-युवतियां उपवास में करम राजा को लाने के लिए करम टोंका किया. उपवास नवयुवक द्वारा करम डाल काटकर युवतियों को सौंपा गया. उसके बाद सारे उपवास युवक-युवतियों ने करम डाल का श्रद्धा के साथ पूजा की. उसके बाद नाचते-गाते हुए करम राजा का अखाड़ा तक ले आयें. करम डाल अखाड़ा में गढ़ने के बाद पाहन पुजारी व उनकी धर्म पत्नी धूमन-धूप करने के बाद लाल मुर्गा की पूजा की जाती है. उसके कुछ देर बाद करमा एवं धरमा दो महानवीरों की कथा सुनायी जाती है. उसके बाद रातभर बहुत ही हर्षोल्लास के साथ नाच-गान किया जाता है और दूसरे दिन शाम को करमा डाल की विसर्जन की जायेगी. यह राजी करम त्योहार (भादो एकादशी व्रत) हमारे पूर्वजों की देन है, जिसे हम उरांव आदिवासी युगों-युगों से मनाते आ रहे हैं. यह महान सामाजिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्रत करमा और धरमा दो महान वीरों के कर्म-धर्म एवं सत्य की शक्ति से सृजन हुआ है. इसे भी पढ़ें : मुसाबनी">https://lagatar.in/musabani-gate-jam-movement-postponed-after-talks-with-hcl-unit-head/">मुसाबनी

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आज भी भारतवर्ष के विभिन्न जातियों द्वारा विभिन्न प्रांतों में विशेषत: छोटानागपुर के कोने-कोने में अलग-अलग रस्मों से इस महान करम पूजन (व्रत) को बड़ी श्रद्धापूर्वक धूमधाम से मनाया जाता है. इस वर्ष भी भादो एकादशी के शुक्ल पक्ष में करम त्योहार बड़ी सादगी के साथ मनाया जाएगा. इस अवसर पर उरांव समाज संघ, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा सभी माता-पिता भाई-बहन तथा बच्चों को हार्दिक धन्यवाद देती है और नेक कर्म के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है. उरांव समाज संघ की निर्देशों का पालन करते हुए त्योहार (करम पूजन) को विधिपूर्वक सादगी से मनाने का आह्वान किया गया. इस अवसर पर समाज के मुखिया लालू कुजूर, चमरू लकड़ा, शम्भू टोप्पो, खुदिया कुजूर, सीताराम मुंडा, जगरनाथ लकड़ा, राजेन्द्र कच्छप, दुर्गा कुजूर, मंगरू टोप्पो, जगरनाथ टोप्पो, कृष्णा मुंडा, बंधन खलखो, विकास लकड़ा, नितेश लकड़ा, रमेश लकड़ा, सूरज लकड़ा, रवि कुजूर, नकुल टोप्पो, दीपक टोप्पो, निशांत मिंज, राजू कुजूर, पन्नालाल कच्छप, बुधराम कोया, रवि तिर्की, लखिन्द्र लकड़ा, अमित कुजूर, राहुल कुजूर, सागर लकड़ा, नितेश कुजूर, अंकुश कोया, लखन टोप्पो, सूरज टोप्पो, सुजल तिर्की, नेहाल कुजूर, कृष्णा तिर्की, मंगल लकड़ा, रवि तिग्गा, लक्ष्मी कच्छप, सावित्री कच्छप, लक्ष्मी खलखो, पुतुल खलखो, शांति कुजूर, तितरी टोप्पो, प्रीति तिर्की, किरण कोया, शिल्पा तिग्गा, पूनम तिग्गा, मोनी कच्छप, नंदनी टोप्पो, पार्वती कुजूर, बिंदिया कच्छप, संध्या टोप्पो, पूनम लकड़ा, भारती कुजूर आदि काफी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे. [wpse_comments_template]

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