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चाईबासा : टाटा स्टील की थ्योरी और प्रैक्टिकल में बहुत अंतर : सिंकु

 
Chaibaaa (Sukesh Kumar) : टाटा स्टील की कॉरिडोर प्रोजेक्ट का विरोध करने के लिए झारखंड  पुनरुत्थान अभियान की बैठक मंगलवार को हुई. इसकी अध्यक्षता अभियान के संयोजक कोलंबस हंसदा ने की. बैठक में झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संस्थापक सदस्य पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि टाटा स्टील कंपनी की थ्योरी और प्रैक्टिकल में बहुत अंतर है. कंपनी कहती कुछ है और करती कुछ है. इसका सबसे बढ़िया उदाहरण जमशेदपुर टाटा नगर है. जब 1911 में टाटानगर में टाटा स्टील ने कंपनी शुरू की तब यहां की जनसंख्या मात्र 5,000 थी, जो अब 15 लाख है. जमीनदाता का अता पता नहीं है. ढिबरी से खोजने से नहीं मिलेंगे. इस तरह आदिवासी मूलवासियों की ऐसे दुर्गति न हो इसके लिए झारखंड पुनरुत्थान अभियान टाटा स्टील कॉरिडोर प्रोजेक्ट का विरोध किया करती है. इसे भी पढ़ें : कानपुर">https://lagatar.in/kanpur-fire-deputy-cm-talks-to-victims-sdm-suspended-fir-on-39-two-arrested-including-lekhpal/">कानपुर

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अभियान संयोजक सन्नी सिंकु ने कहा कि कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिला क्रमश पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला खरसावां जिला अनुसूचित जिला है. अनुसूचित जिला में आदिवासियों के संरक्षक राज्यपाल होते हैं. आदिवासियों की सामाजिक, पारंपरिक, रूढ़ी या प्रथा,संस्कृति, देशाउली, सासन दिरी,सरना स्थल, जहेरतान यानी अपनी अस्तित्व का रक्षा करने के लिए प्रभावित गांव के ग्रामीणों के साथ बैठक करके राज्यपाल और सरकार को मांग पत्र सौंपेंगे. बैठक में अभियान के संयोजक अमृत मांझी, शैली शैलेंद्र सिंकू, जयपाल,राजवीर, बाल कृष्ण डोराईबुरु और अन्य उपस्थित थे. [wpse_comments_template]  
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