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चाईबासा : सालीसाई गांव में 75 साल बाद भी पानी नहीं, तरस रहे ग्रामीण

Chaibasa (Sukesh kumar) : चापाकलों और कुओं के जलस्रोतों के लगातार नीचे गिरने और रात-रात भर जागकर घंटों इंतजार के बाद भी पानी नहीं मिलने से सालीसाई गांव के ग्रामीणों ने मंझारी प्रखंड के जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक की. यहां पेयजल की समस्या से नाराज होकर ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर और मझगांव विधानसभा के विधायक निरल पूर्ति की शव यात्रा निकाल कर खराब पड़े चापाकल के पास पुतला दहन किया. इसे भी पढ़ें : हाईकोर्ट">https://lagatar.in/on-first-day-in-new-building-hearing-case-jharkhand-education-tribunal-was-held-in-bench-5-judges/">हाईकोर्ट

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माधव चंद्र कुंकल ने कहा कि सरकार जिस तरीके से शिथिल है, उसी प्रकार विभाग के पदाधिकारी भी शिथिल हैं. खराब चापकलों के पाइप बदलने की शिकायत की जाए या पेयजल की समस्या के निदान के लिए लिखित आवेदन विभाग को देने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती. इस सरकार में मंत्रियों के लिए 10 करोड़ खर्च कर बंगला बन सकता है. लेकिन खराब चपाकल का पाइप बदलने के लिए पैसा खर्च नहीं हो सकता. कितने दुर्भाग्य की बात है कि देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोग आजादी के 75 सालों के बाद भी एक-एक बूंद साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आनंद बिरुवा, रुपसिंह बिरुवा, प्रदान बिरुवा के घर के पास स्थित कुआं सूख गया है. इसे भी पढ़ें : पीरटांड़">https://lagatar.in/pirtand-drought-like-conditions-are-being-created-due-to-lack-of-rain/">पीरटांड़

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चापाकल से 1 घंटा में एक डेकची ही भरता है पानी

सोमा बिरुवा के घर के पास चापाकल खराब है. रामेश्वर बिरुवा घर के पास जलमीनार खराब है. प्राथमिक विद्यालय सालीसाई के पास स्थित चापाकल से एक घंटा में एक डेकची पानी ही भर पाता है. ग्रामीणों को दूर के गांव पानी भरने के लिए जाना पड़ रहा है और विभाग मौन है. पेयजल की समस्या के विरुद्ध 22 जून को हजारों की संख्या में ग्रामीण डेकची, बर्तन के साथ प्रखंड कार्यलय का घेराव कर विरोध दर्ज करेंगे. मौके पर चुइया गोप, रामेश्वर बिरुआ, घनश्याम बिरुवा, सर्द सिंकू, घासीराम बिरुवा, आशामती बिरुवा, पंतुस बिरुवा, संजीर कोडेंकेल, मुक्ता बिरुवा, सीता बिरुवा, सूत्री बिरुवा, जानकी बिरुवा, सिकुर बिरुवा, नानिका बिरुवा, राधिका बिरुवा, लक्ष्मी बिरुवा आदि मौजूद थे. [wpse_comments_template]

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