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चाईबासा : आदिवासी मूलवासी ग्रामीण अपनी इच्छा से विस्थापित नहीं होना चाहते - कोलंबस हांसदा

 
Chaibasa (Sukesh Kumar) : ईचा खड़कई बांध यानी कुजू डैम से विस्थापित होने वाले 126 गांव के कोई भी आदिवासी मूलवासी ग्रामीण अपनी इच्छा से विस्थापित नहीं होना चाहता है. यही वजह है रुक रुक कर 80 के दशक से विस्थापित होने वाले ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे है. लेकिन झारखंड सरकार ग्रामीणों की विरोध के आवाज को सुनकर भी नहीं सुनने का नाटक कर रही है. यह बातें झारखंड आंदोलनकारी बड़ा झींकपानी पंचायत के पूर्व मुखिया झारखंड पुनरूत्थान अभियान के संयोजक कोलंबस हांसदा ने कहीं. उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा शुरुवाती दौर से कुजू डैम का विरोध कर रहा है और जब गंगाराम कालुंडिया की हत्या हुई थी तब तत्कालीन बिहार विधानसभा के पूर्व गोड्डा विधायक सूरजमंडल ने विधानसभा में आवाज उठाई थी. इसे भी पढ़ें :चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-passengers-upset-due-to-water-logging-in-the-underpass/">चाकुलिया

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ग्रामीणों में सरकार के प्रति नाराजगी

उन्होंने कहा कि झारखंड बनने के बाद कोई भी झारखंड मुक्ति मोर्चा का विधायक कुजू डैम को रद्द करने के लिए मुखर होकर विधानसभा में सवाल क्यों नहीं उठाता. ऐसे में कुर्सी गांव में हुई बैठक के बाद कुजू डैम का विरोध करने वाले ग्रामीणों को समर्थन करना लाजिमी है. जिसमें ग्रामीणों की प्रतिक्रिया सरकार और स्थानीय विधायक, मंत्री के खिलाफ है. आखिर उस समय के मुख्यमंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन ने कुजू डैम को रद्द करने के लिए टीएसी की उप समिति का गठन कर विस्थापित गांव के ग्रामीणों का ग्रामसभा में मंतव्य मांग सकते थे. उस टीएसी की उपसमिति द्वारा ग्रामीणों की ग्रामसभा से पारित और उप समिति को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सरकार कुजू डैम को क्यों रद्द नहीं कर रही है. चुनाव के समय तो झारखंड मुक्ति मोर्चा ने घोषणा किया था की सत्ता में आते ही कुजू डैम को रद्द कर दिया जाएगा. इसे भी पढ़ें :मध्यप्रदेश">https://lagatar.in/madhya-pradesh-accused-of-making-a-controversial-tweet-about-golwalkar-fir-lodged-against-digvijay-singh/">मध्यप्रदेश

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