Chaibasa (Sukesh kumar) : झारखंड जनाधिकार महासभा ने सार्वजनिक अपील पत्र जारी कर सभी पक्षों से पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों में आदिवासियों पर हो रही हिंसा को रोकने की मांग की है. पिछले कुछ महीनों से पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा के वन क्षेत्रों, खास कर सदर, गोईलकेरा व टोंटो प्रखंडों, के आदिवासी-मूलवासियों का जीवन उथलपुथल हो गया है. एक तरफ सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान हिंसा और दुसरी ओर माओवादियों द्वारा हिंसा. इसके बीच निर्दोष आदिवासी-मूलवासी फंसे हुए हैं. बिना ग्राम सभा की सहमति के सुरक्षा बलों के कैंप बैठाए जा रहे हैं जो पांचवी अनुसूची प्रावधानों व पेसा का खुला उल्लंघन है. इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-one-injured-in-road-accident-tmh-refer/">चांडिल
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गावों में डर व दमन का है माहौल
गावों में डर और दमन का माहौल है. सुरक्षा बलों और माओवादियों की आपसी लड़ाई के डर से आदिवासी अपने जंगल भी नहीं जा पा रहे हैं, जो उनके लिए जीवनरेखा है. हाल के दिनों में, शाम होते ही सुरक्षा बलों द्वारा गावों की दिशा में गोलीबारी एवं मोर्टार दागे जा रहे हैं. दूसरी ओर माओवादियों द्वारा जवाबी कार्यवाई का डर. गांव के युवा, बच्चे, बुज़ुर्ग व महिलाएं, सब दहशत में हैं. डर से महिलाएं घर में कैद हो गई है अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं. इसे भी पढ़ें :दिल्ली">https://lagatar.in/delhi-liquor-scam-ca-buchi-babu-of-telangana-cm-kcrs-daughter-arrested/">दिल्लीशराब घोटाला : तेलंगाना के CM केसीआर की बेटी का सीए बुच्ची बाबू गिरफ्तार
यह परिस्थिति अत्यंत दुखद व चिंतनीय है
कई गावों में बिना सहमति के कैंप स्थापित होने के बाद गांव-समाज में फूट पड़ रही है. गांव का माहौल बिगड़ रहा है. कैंप के आसपास विदेशी शराब गैर-कानूनी तरीके से बीकने लगा है. आदिवासी अपनी परंपरा अनुसार न पूजा कर पा रहे हैं और न जी पा रहे हैं. गैर-आदिवासी व बाहरी सुरक्षा बल की उपस्थिति से गांव में तनाव का माहौल है. इसके एवं अपनी समाज में हो रहे शोषण-अत्याचार के विरोध में अपनी प्रतिक्रिया देने वाले आम ग्रामीणों को माओवादियों के समर्थक के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा बलों के डर से ग्रामीण अपनी ग्राम सभा तक नहीं कर पा रहे हैं. यह परिस्थिति अत्यंत दुखद और चिंतनीय है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-nalsa-established-legal-defense-cell-in-seraikela-civil-court/">आदित्यपुर: सरायकेला व्यवहार न्यायालय में नालसा ने लीगल डिफेंस सेल की स्थापना की
आदिवासी युवाओं पर पुलिस फर्ज़ी मामले दर्ज कर रही है
हो आदिवासी सदियों से अपने स्वाभिमान और जल, जंगल, ज़मीन व प्रकृति के साथ खुले मन से जीए हैं. लेकिन आज वे अपने ही क्षेत्र में कैदी जैसा जीवन जाने को मजबूर हैं. माओवादियों द्वारा किए गए हिंसा की घटना में निर्दोष आदिवासी युवाओं पर पुलिस फर्ज़ी मामले डाले जा रहे हैं. युवाओं को बिना वारंट के कई दिनों तक थाना व कैंप में रखा जा रहा है. ग्रामीण स्थानीय अधिकारीयों व विधायकों से कई बार गुहार लगा चुके हैं. माओवादियों और सुरक्षा बलों के हिंसा के बीच आम ग्रामीण–आदिवासी पीस रहे हैं. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragoda-the-seventh-mass-marriage-ritual-on-february-27-with-the-efforts-of-dr-goswami/">बहरागोड़ा: डॉ. गोस्वामी के प्रयास से सातवां सामूहिक विवाह अनुष्ठान 27 फरवरी को
पेसा को कड़ाई से लागू किया जाए
झारखंड जनाधिकार महासभा दोनों पक्षों से अपील करती है कि उनकी लड़ाई में आम ग्रामीणों पर हिंसा न हो एवं आम ग्रामीणों के जीवन को बर्बाद न किया जाए. प्रशासन व पुलिस से मांग करते हैं कि बिना ग्राम सभा की सहमति के सुरक्षा बलों कैंप नहीं लगाए. मात्र संदेह के आधार पर या माओवादियों को खाना खिलाने के कारण आदिवासी युवाओं को माओवादी हिंसा मामले में फ़र्ज़ी रूप से न जोड़ा जाए. हम अपील करते हैं कि पुलिस व प्रशासन संवैधानिक व क़ानूनी दायरे में अपनी कार्यवाई करे. राज्य सरकार से भी मांग करते हैं कि तुरंत ज़िला व अन्य आदिवासी क्षेत्रों में पांचवी अनुसूची प्रावधानों व पेसा को कड़ाई से लागू करें. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-the-road-connecting-mohanpur-to-nh-49-is-in-bad-shape-anger-among-the-villagers/">बहरागोड़ा: मोहनपुर से एनएच 49 को जोड़ने वाली सड़क बदहाल, ग्रामीणों में आक्रोश
आदिवासी अपने ही क्षेत्र में जिन्दा लाश की तरह जी रहे है
इतिहास गवाह है कि दोनों पक्षों की ऐसी कार्यवाई के बाद धीरे-धीरे आदिवासियों से उनकी ज़मीन और जंगल छीन ली जाती है और आदिवासी अपने ही क्षेत्र में जिन्दा लाश की तरह जीते हैं. हम स्थानीय विधायकों व सांसद से अपील करते हैं कि स्थिति को सामान्य बनाने एवं इन क्षेत्रों के आदिवासियों के लिए लोकतंत्र को पूर्ण बहाल करने के लिए उचित मार्गदर्शन दें. वे इन गाँवों में जाकर, ग्रामीणों से बात कर स्थिति को स्वयं देखने समझने और उन्हें बेबसी और आतंक की स्थिति से उबारने का दायित्व निभायें. मुख्यमंत्री से इन गांवों के ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उन्हें इस स्थिति से मुक्ति दिलाने की विशेष अपेक्षा है. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragoda-the-seventh-mass-marriage-ritual-on-february-27-with-the-efforts-of-dr-goswami/">बहरागोड़ा: डॉ. गोस्वामी के प्रयास से सातवां सामूहिक विवाह अनुष्ठान 27 फरवरी को [wpse_comments_template]
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