Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha) : अपनी स्थापना के एक दशक के भीतर ही
कुमारडुगी आर्चरी सेंटर ने अपनी सफलता का परचम लहराया
है. आज इस केंद्र के अनेक तीरंदाज राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीतकर न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि इस खेल के बदौलत भारत सरकार के अनेक संस्थानों में नौकरी भी कर रहे
हैं. इस केंद्र की स्थापना कोच गंगाधर नाग ने 13 फरवरी 2013 को एक
झोपड़ी से की
थी. तब से लेकर अब तक इस केंद्र के तीरंदाज विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और अनेकों मेडल जीतकर संस्थान का नाम रौशन किया
है. इसके सीनियर
खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभाओं को बिखेर चुके हैं तो कुछ तीरंदाज अर्धसैनिक बल और सेना में अपनी सेवाएं दे रहे
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बीएड छात्रों ने की डीईओ से पीओटी के लिए स्कूल आवंटित करने की मांग 20 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं
इसके अलावा कई
खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया
है. अभी सेंटर पर 20 से अधिक ऐसे
खिलाड़ी हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके
हैं. इस प्रशिक्षण केंद्र के सीनियर
खिलाड़ी मौसम का
लड़ाई राष्ट्रीय वनवासी तीरंदाजी प्रतियोगिता में एक स्वर्ण पदक सहित 4 मेडल जीत चुके हैं और इस उपलब्धि के बदौलत उनका चयन आर्मी ब्वॉयज टीम के लिए हुआ
है. वर्तमान में आर्मी की तरफ से खेलते
हैं. महिला तीरंदाज
जयश्री गागराई 2013 से 2019 के राष्ट्रीय बनवासी नेशनल गेम्स में एक गोल्ड मेडल और 4 पदक जीतकर अपनी सफलता का परचम लहराया
है. वर्तमान में वह असम राइफल्स में अपनी सेवाएं दे रही
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: मागे पर्व पर लोगों ने मांदर की थाप पर किया नृत्य अनेक तीरंदाजों ने जीते हैं पदक
इस केंद्र के तीरंदाज कृष्ण
पिंगुआ ने 10, जगन्नाथ गागराई ने 8, गुना राम
पुरती ने 8, जयपाल पूर्ति ने 12,
हिरामनि सिंकू ने 8 मौसम
गगराई ने चार जगदीश गागराई ने दो तथा
तूरी पिंगुआ, राजेश पूर्ती, चंद्रमोहन तामसुई, मानकी पूर्ति 11 मेडल जीत कर संस्थान के नाम को रोशन किया
है. 2016 में इस संस्था को सरकार सेन्टर का दर्जा प्राप्त हुआ. [wpse_comments_template]
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