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चाईबासा : स्ट्रॉबरी की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहीं महिला किसान

Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha)पश्चिम सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड के छोटा कोयता गांव के ग्रामीण महिलाएं स्ट्रॉबेरी की खेती से आत्मनिर्भर बन रही हैं. इस खेती के लिए झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएलपीएस) ने उन्हें झीमड़ी प्रोजेक्ट के तहत इन महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है. ये महिलाएं 1.25 एकड़ भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं. इस खेती में लगभग पांच महिला समूह में 25 महिलाएं काम कर रही हैं. प्रत्येक महिला समूह में पांच-पांच महिलाएं हैं. इसे भी पढ़ें : आठ">https://lagatar.in/accused-of-shooting-absconding-for-eight-years-arrested-sent-to-jail/">आठ

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2018 से हुई थी शुरुआत

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alt="" width="600" height="400" /> तांतनगर प्रखंड में 2018 में स्ट्रॉबरी की खेती की शुरुआत हुई थी. तब इसके प्रति किसानों की ललक बहुत कम थी, पर आज इस खेती के प्रति पांच महिला समूह से जुड़ी 25 महिलाएं इस कार्य में लगी हुई हैं. कार्य को करने के लिए इन महिलाओं को प्रशिक्षण व तकनीक दोनों ही दिया गया. आज महिलाएं अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ रही हैं. ये महिलाएं सब्जी की खेती भी करती हैं. इसके साथ स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं. इस‌ खेती में उनका श्रम तो लगता ही पर उन्हें अपने उत्पाद के लिए बाजार की तलाश नहीं करनी पड़ती. उनके खेत से ही उत्पादों की बिक्री बिना कोई मोल भाव के हो जाता है. इसे भी पढ़ें : जादूगोड़ा">https://lagatar.in/jaduguda-two-day-writer-poet-conference-of-tribal-bhumij-samaj-concluded/">जादूगोड़ा

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10 हजार पौधों को लगाया गया है खेत में  

स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए महिला समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी दी गई. इसके अलावा विशेषज्ञों की देखरेख में खेतों में स्ट्रॉबरी के पौधे लगाए गए तथा डीप इरिगेशन के माध्यम से इनमें सिंचाई की व्यवस्था की गई है. छोटा कोयता की स्ट्रॉबरी उत्पादक सविता बोदरा ने बताया कि पौधा और तकनीक तथा सिंचाई की सुविधा सब जेएलपीएस के माध्यम से कराया गया है. सविता बोदरा किरण स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं. उन्होंने बताया कि वे लोग प्रतिदिन 8 से 10 किलो स्ट्रॉबरी का उत्पादन कर रही हैं. उन्हें बेचने के लिए बाहर में जाने का मौका ही नहीं लग पाता, क्योंकि ज्यादातर स्ट्रॉबरी खेत से ही बिक जाते हैं. झीमड़ी प्रोजेक्ट की इंचार्ज सोमा मार्डी ने बताया कि इस कार्य में महिला कृषकों के साथ-साथ उनके परिवार के सभी लोग सहयोग करते हैं. अच्छा उत्पादन के साथ-साथ अच्छी आय भी प्राप्त हो रही है. [wpse_comments_template]

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