Chaibasa (Ramendra Kumar Sinha) : भक्ति भाव से पूजा करने पर प्रसन्न होने वाले
देवों के देव महादेव की पूजा सभी करते
हैं. पश्चिमी सिंहभूम के झिंकपानी प्रखंड के सिंह पोखरिया में खुले आसमान के नीचे भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक अपने आप में अनूठा
है. यह पूजा पिछले 250 वर्षों से अधिक वर्षों से खुले आसमान के नीचे होती आ रही
है. भगवान भोलेनाथ एक खेत के बीच में विराजमान
हैं. यहां पर आसपास के गांव की
बड़ी संख्या में श्रद्धालु सावन मास के प्रत्येक सोमवार को एकत्र होकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते
हैं. धान की खेती का मौसम होने से नहीं होती है मेले का आयोजन
इस दौरान पूजा कराने वाले पुजारी पंडित हीरालाल पति कहते हैं कि उनके परिवार की चौथी पीढ़ी है जो आज भी प्रत्येक सोमवार को पूजा कराते
हैं. प्रत्येक सोमवार को यहां पर ग्रामीणों की अच्छी
भीड़ होती है क्योंकि भगवान भोलेनाथ खेतों के बीच में विराजमान हैं और यह मौसम धान की खेती का होता है इसलिए कोई मेला का आयोजन तो नहीं हो पाता फिर भी श्रद्धालुओं की
भीड़ अच्छी खासी होती
है. इस गांव के आसपास के अलावा चाईबासा सहित अन्य प्रखंडों के लोग ही नहीं बल्कि आसपास के लोग भी वहां पर जाकर भगवान भोले नाथ का जलाभिषेक करते
हैं. पोखरिया का यह स्थल अन्य माह में लोगों से दूर रहता है
पंडित हीरालाल पति बताते हैं कि अगर यहां पर सब कुछ सुव्यवस्थित हो जाए तो और भी अच्छे तरीके से पूजा-पाठ हो सकता
है. इस जगह पर भगवान के लिए बाकायदा उनका अरघा भी बनाया हुआ है जिसके बीच भगवान विराजमान हैं पोखरिया का यह स्थल अन्य माह में लोगों से दूर रहता है पर सावन माह में श्रद्धालुओं की
भीड़ आना आरंभ हो जाती है और इसका इंतजार स्थानीय लोगों को बहुत बेसब्री से रहता
है. [wpse_comments_template]
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