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चैत्र नवरात्रि : पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, माता को सफेद रंग प्रिय

Lagatar Desk :  चैत्र नवरात्र हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है. इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल यानी आज से शुरू हो रहा है. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि मां के नौ स्वरूपों में नवग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति होती है. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने से अलग-अलग लाभ मिलते हैं. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा का विधान है.

मां को अर्पित करें सफेद पुष्प

पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. माता का वाहन बैल होने के कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. इसके अलावा शैलपुत्री को सती, हेमवती और उमा के नाम से भी जाना जाता है. घोर मां शैलपुत्री के दो हाथों में से दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का फूल सुशोभित है. मां शैलपुत्री को स्नेह, करूणा, धैर्य और इच्छाशक्ति का प्रतीक माना जाता है. मां शैलपुत्री को सफेद वस्तु अति प्रिय है, इसलिए मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पण करें और सफेद मिठाई या रसगुल्ला का भोग लगायें.  पहले दिन मां का प्रिय भोग गाय के घी से बना मिष्ठान अर्पित करें.

सती ने अगले जन्म में शैलपुत्री के स्वरूप में लिया जन्म, शिव से की शादी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजन्म में शैलपुत्री का नाम सती था और वह भगवान शिव की पत्नी थीं. सती के पिता राजा दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया था. राजा दक्ष ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए शिव जी को यज्ञ में नहीं बुलाया. देवी सती यज्ञ में जाना चाहती थी, लेकिन शिव जी ने वहां जाना उचित नहीं समझा. लेकिन पत्नी के आग्रह करने पर शिव मान गये और सती को यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती ने जब पिता के मुख से भगवान शंकर के लिए अपशब्द सुने तो वह पति का निरादर सहन नहीं कर पायीं. इसके बाद सती ने अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्म कर लिया. इसके बाद अगले जन्म में सती शैलपुत्री के स्वरूप में प्रकट हुईं और भगवान शिव से फिर विवाह किया.

इस विधि से करें मां शैलपुत्री का पूजन

कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री के विग्रह या चित्र को लकड़ी के पटरे पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करें. आप सफेद आसन पर उत्तर दिशा में मुंह करके बैठें. इसके बाद माता शैलपुत्री को धूप, दीप दिखाकर अक्षत, सफेद फूल, सिंदूर, फल चढ़ायें.  एक साबुत पान के पत्ते पर 27 फूलदार लौंग रखकर मां को अर्पित करें. इसके बाद ॐ शैलपुत्रये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें. जाप के बाद सारे लौंग को कलावे से बांधकर माला का स्वरूप दें. अपनी मनोकामना को मन में बोलकर लौंग की माला को दोनों हाथों से मां शैलपुत्री को अर्पित करें. ऐसा करने से आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी. साथ ही पारिवारिक कलह हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा.

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