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चक्रधरपुर : केरा एवं पाउड़ी मंदिर में चैती पूजनोत्सव हुआ शुरू

Chakradharpur : मां भगवती मंदिर (केरा) और मां पाउड़ी मंदिर (पुराना बस्ती) में 13 और 14 अप्रैल को चैती मेले का आयोजन किया जाएगा. चैती मेला से पूर्व घटयात्रा निकालने की परंपरा है. ऐतिहासिक केरा मेला की शुरुआत रविवार की देर रात यात्रा घट से हो गई है. जबकि मां पाउड़ी मंदिर में शुभ घटयात्रा से शुरु हुई. मां भगवती केरा मंदिर में यात्रा घट लगभग रात साढ़े 11 बजे डाहणी डूबा घाट से निकाली गई. डाहणी डूबा घाट में मां केरा की पूजा-अर्चना की गई. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-petrol-bottle-bomb-attacked-the-hut-the-woman-narrowly-survived/">चक्रधरपुर

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84 मौजा के श्रद्धालुओं ने की यात्रा घट के दर्शन

मान्यता है कि यात्रा घट के साथ मां केरा स्वयं चलती हैं. पूरी पवित्रता के साथ यात्रा घट को घाट से निकाल कर मंदिर तक लाया गया. केरा मंदिर में घंटों घट की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद राजबाड़ी ले जाकर स्थापित किया गया. यात्रा घट को पूरे केरा गांव का भ्रमण कराया गया. यात्रा घट को पूरे गांव का परिभ्रमण कराने में करीब चार घंटे का समय लगा. इस दौरान निर्जला उपवास रख कर मन्नत रखने वाले श्रद्धालुओं ने जगह-जगह घट की पूजा-अर्चना की. रात भर केरा गांव में भक्ति का माहौल रहा. 84 मौजा के श्रद्धालुओं ने आकर यात्रा घट का दर्शन कर पूजा-अर्चना की. अहले सुबह तक यात्रा घट का पूजा -अर्चना होती रही. इसी तरह चक्रधरपुर के पुराना बस्ती में देर रात पूजा-अर्चना की गई. इसे भी पढ़ें : सुरक्षाबलों">https://lagatar.in/security-forces-killed-2-terrorists-including-a-pakistani-in-kulgam/">सुरक्षाबलों

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12 को निकलेगी गोरियाभार घट

जानकारी के अनुसार 12 अप्रैल को मां भवगती मंदिर केरा में गोरियाभार घट निकलेगी तथा छऊ नृत्य का आयोजन किया जाएगा. 13 अप्रैल को मां केरा मंदिर तथा मां पाउडी मंदिर में जल चढ़ाव व पूजा-अर्चना होगी. भक्तों के लिए मां का पट सुबह पांच बजे से खोल दिया जाएगा. दिन भर मां केरा की दर्शन कर लोग पूजा-अर्चना कर पाएंगें. 14 अप्रैल को केरा मेला का समापन होगा. इस दिन कालिका घट निकलेगी. संपूर्ण केरा गांव में कालिका घट का भ्रमण कराया जाएगा. समापन के दिन सैकड़ों श्रद्धालु नंगे पांव आग पर चल कर व कांटों पर लेट कर अपनी हठभक्ति प्रदर्शित करेंगे. केरा मेला पश्चिमी सिंहभूम का सबसे बड़ा व ऐतिहासिक मेला है. [wpse_comments_template]

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