Chakradharpur (Shambhu Kumar) : प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर पहाड़ों के बीच बसे
भरनिया पंचायत के
भरनिया गांव में नगर
परिषद् की ओर से कचरा निस्तारण प्लांट का निर्माण कराया जाना है. इसका विरोध अभी से ही शुरू हो गया
है. इसे लेकर रविवार को
भरनिया के पंचायत भवन में एक बैठक
हुई. इसमें गांव के मुंडा कमल किशोर गागराई, पंचायत की मुखिया सरिता गागराई, पंचायत समिति सदस्य मथुरा गागराई भी मुख्य
रुप से उपस्थित थे
. इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति जमकर रोष
जताया. ग्रामीणों ने कहा कि पहाड़ों के बीच बसे उनके गांव में प्लांट का निर्माण कर गांव पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा
है, जबकि शहरी क्षेत्र में काफी जगह है. गांव के बेहतर पर्यावरण को बिगाड़ने की कोशिश हो रही
है. इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को परेशान करने काम किया जा रहा
है. ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन किसी भी हाल में कचरा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन नहीं देंगे
. बैठक के दौरान पंचायत समिति सदस्य मथुरा गागराई, मुंडा कमल किशोर गागराई, समाजसेवी गंगाराम गागराई, हरिशचंद्र गोप, धनकुंवर सामड, मांगु महतो, सरिता सरदार, अनिता गोप के अलावे बड़ी संख्या में गांव के महिला-पुरुष ग्रामीण मौजूद थे. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-free-health-check-up-camp-organized-inaugurated-by-former-chief-minister/">घाटशिला
: निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित, पूर्व मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन गांव की भूमि छिनने का किया जा रहा प्रयास
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https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/23rc_m_140_23042023_1.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> प्लांट के विरोध में उपायुक्त के नाम मुखिया को पत्र सौंपते ग्रामीण[/caption] इस मौके पर ग्रामीणों ने उपायुक्त के नाम मुखिया
सरीता गागराई को पत्र भी
सौंपा. पत्र में कहा गया है कि 18 अप्रैल को पोड़ाहाट एसडीओ रीना हांसदा के द्वारा बुलाई गई बैठक में ग्रामीण मुंडा कमल किशोर गागराई, पूर्व ग्रामीण मुंडा गोरा लाल गागराई , ग्राम पंचायत की मुखिया
सरीता गागराई को कचरा निस्तारण प्लांट लगाने के बारे में जानकारी दी गई
थी. एसडीओ ने इसके फायदे
बताये थे, लेकिन इससे होने वाले नुकसान के बारे में नहीं
बताया. ग्रामीणों ने कहा कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा करना हमारा कर्तव्य
है. गांव के किसान खेती पर निर्भर रहते हैं, बच्चों के खेलने के लिए गांव में बड़ा मैदान है, लेकिन अधिकारियों द्वारा गांव की भूमि को छिनने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी हालत में नहीं होने दिया
जाएगा. इसे भी पढ़ें : मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-two-lakh-stolen-including-30-thousand-cash-from-former-chiefs-house/">मनोहरपुर
: पूर्व मुखिया के घर से 30 हजार नकद समेत दो लाख की चोरी नदी भी हो जाएगी प्रदूषित
इस गांव की 60 प्रतिशत भूमि पर कृषि कार्य, 30 प्रतिशत भूमि पर वनक्षेत्र फैला हुआ
है. जिसकी रक्षा के लिए विभिन्न टोलों में पांच
वनरक्षा समिति गठित की गई
है. जिसके
सदस्य प्रतिदिन बारी-बारी से वनों की रक्षा हेतु वनों की
परिक्रमा करते रहते
हैं. बचे
हुये चार प्रतिशत लगभग 25 प्रतिशत भूमि पर केन्द्रीय रिजर्व बटालियन 157 ने स्थायी कैंप स्थापित किया
है. चयनित भूमि के आसपास काफी लोग रहते है. इस भूमि के चारों ओर घरों की दूरी मात्र 200 मीटर से भी कम है. साथ ही भूमि से होकर एक पहाड़ी नदी भी गुजरती है, जो प्लांट निर्माण होने से यहां के दूषित तत्वों को पूरे क्षेत्र में फैलाएगी.
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