Search

चक्रधरपुर: रेलवे इंग्लिश मीडियम के 86 बैच के विद्यार्थियों का 36 वर्ष बाद हुआ पुनर्मिलन

Chakradharpur :  चक्रधरपुर के दक्षिण पूर्व रेलवे इंग्लिश मीडियम मिक्स्ड हायर सेकेंडरी स्कूल के 1986 बैच के विद्यार्थियों का 36 वर्ष बाद पुनर्मिलन हुआ. लंबे अरसे के इंतजार के पश्चात हर्षोल्लास के साथ पुनर्मिलन समारोह का आयोजन उसी स्थान पर हुआ, जहां से सबने दसवीं बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण की और अलग-अलग दिशाओं में अपने आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिये चले गए थे. 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक आयोजित पुनर्मिलन समारोह  उनके लिये स्वर्णिम यादगार बन गया. बचपन के बिछड़े इन मित्रों की टोली ने अल्हड़ता से धूम मचाई. साथ नाचे, गाना गाए और इन तीन दिनों में फिर से अपने बचपन को जी भर कर जी लिया. इसे भी पढ़ें: चक्रधरपुर:">https://lagatar.in/chakradharpur-cycle-rally-fired-message-to-save-fuel/">चक्रधरपुर:

साइकिल रैली निकाल दिया ईंधन बचाने का संदेश

संस्कृति शिक्षिका से मिलकर दिया उपहार

इस दौरान 86 बैच के विद्यार्थियों ने अपनी संस्कृत शिक्षिका मिस कमला मजूमदार से उनके निवास स्थान पर भेंट की. यादगार स्वरूप उन्हें उपहार के साथ सरोज की स्वलिखित दो पुस्तकें "द वाइल्उ इन मी" और "दिल की गहराइयों से" भेंट की. मिस मजूमदार की आंखें खुशी के आंसू से भर आए, जब उन्हें अपने पढ़ाए हुए विद्यार्थियों से स्नेह और आदर मिले. कृष्णा विश्वकर्मा और एंथनी फर्नांडो ने रहने, खाने और घूमने-घूमाने की सारी व्यवस्था की.

पुनर्मिलन समारोह में अलग-अलग राज्यों से आए सहपाठी

[caption id="attachment_291904" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/17ajsr8.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> चक्रधरपुर में पुनर्मिलन समारोह के दौरान 86 बैच के विद्यार्थी.[/caption] पुनर्मिलन समारोह में अलग-अलग राज्यों से 15 सहपाठी और दो बच्चे शामिल हुए. सभी की आंखों में स्नेह की नमी और ह्रदय में प्रेम की भावना दिखी. सारी यादों को संजो कर तीन दिन कैसे बीत गए, उन्हें पता ही नहीं चला. मनोज, विजया, रूबी, भानू, लॉरेन, सोमा, जबीन, पाल बॉबी, कृष्णा, एन्थोनी, शैरान, मल्लिकार्जुन, संजय, राजन, सरोज और उसके दो बच्चे यश और ख्याति इस पुनर्मिलन समारोह में शामिल होने वाले सदस्य थे. सबने अपना समय पुरानी यादों को संजोने में बिताया. एक दिन अपने विद्यालय जाकर अपने विद्यार्थी जीवन को जीवंत किया. बर्टन लेक के नज़ारों का लुत्फ उठाया. पंसुवां (सोनुवा) डैम में जाकर खूब मौज की और अंतिम दिवस पर खुशी में चार चांद लगाने के लिये कृष्णा और संजय के परिवार भी शामिल हुए. इसे भी पढ़ें: चाईबासा:">https://lagatar.in/chaibasa-naxalites-running-away-from-the-organization-due-to-the-security-forces-raid-and-surrender-policy/">चाईबासा:

सुरक्षा बलों की दबिश व आत्‍मसमर्पण नीति से संगठन छोड़ भाग रहे नक्‍सली
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp